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तो मरने के 61 साल बाद यहां आए थे जहांगीर?

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नुरुद्दीन मोहम्मद सलीम जहांगीर कांगड़ा कब आए थे? आप जवाब देंगे - 1622 ईसवी में। लेकिन किसी किताब में इसका जवाब 1688 ईसवी लिखा हो तो आप पूछ बैठेंगे कि फिर 8 नवंबर 1627 में कश्मीर से लौटते वक्त चिंगस में किसकी मौत हुई थी। दरअसल, ये तथ्य गढ़े नहीं गए बल्कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की आठवीं कक्षा के ‘हिमाचल लोक संस्कृति और योग’ विषय में छपे हैं।
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गलतियों से भरी इस किताब को आठवीं के हजारों बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। विकीपेडिया वेबसाइट के मुताबिक जहांगीर का जन्म 20 सितंबर, 1569 में हुआ था। 8 नवंबर 1627 में उनका निधन हो गया। वहीं, पिछले चार-पांच साल से सरकारी स्कूलों में आठवीं के हजारों छात्र-छात्राओं को जहांगीर के नूरपुर कांगड़ा आने का 1688 का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
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शिक्षक भी ऐसे ही जो गलत ही पढ़ाने में लगे हुए

किताब में त्रुटियों को किसी भी शिक्षक ने उजागर करने की कोशिश नहीं की। लेकिन अब अभिभावकों ने स्कूल शिक्षा बोर्ड से इस त्रुटि को ठीक करने की मांग करना शुरू कर दिया है ताकि बच्चों के ज्ञान में कोई दुष्प्रभाव न पड़े। उधर, शिक्षा उप निदेशक लाहौल स्पीति प्रेम नाथ परशीरा ने बताया कि फिलहाल मामला उनके ध्यान में नहीं आया है। यदि ऐसा है तो इस बारे में आगे बात रखी जाएगी।

हिमाचल शिक्षा सुधार एवं विकास मंच के अध्यक्ष पीआर सांख्यान ने कहा कि सरकार और विभाग को चाहिए कि किताबें लिखने के लिए उन अधिकारियों की ड्यूटी लगाएं जिन्हें ज्ञान हो। मुख्यमंत्री से आग्रह है कि इस तरह भ्रामक जानकारी स्कूली बच्चों को पढ़ाने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।
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