हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। खनन माफिया चांदी कूट रहा है। इसे रोकने के लिए सरकारी मशीनरी की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिससे प्रदेश सरकार को रोजाना करोड़ों रुपये राजस्व का चूना लग रहा है।
राज्य के सीमांत जिलों सोलन, सिरमौर, कांगड़ा और ऊना में सबसे अधिक अवैध खनन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश में अवैध खनन का काला कारोबार सांठ गांठ से चलाया जा रहा है, जिसका किसी को अंदाजा भी नहीं है।
यही कारण रहा कि मानसून सत्र के पहले दिन ही सत्ता पक्ष की विधायक आशा कुमारी ने अवैध खनन को लेकर विधानसभा में सवाल किया था, जिसका सरकार की ओर से लिखित में जवाब दिया गया। बाद में भाजपा की ओर से भी सदन में सवाल लगाए गए, लेकिन तब तक सत्ता और विपक्ष के बीच भारी तकरार के कारण मानसून सत्र को पांचवें दिन ही समाप्त करने की घोषणा करनी पड़ी।
कार्रवाई का प्रावधान
अवैध खनन को रोकने के लिए जुर्माना करने से लेकर मुकदमा दर्ज करने तक का प्रावधान है, लेकिन सरकारी मशीनरी की ओर से बेहद कम कठोर कार्रवाई की जाती है।
उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि अवैध खनन के किसी प्रकार के नीतिगत मामले में ही कुछ कह सकता हूं। इस मामले में मैं काफी पहले प्रेस कांफ्रेंस भी कर चुका हूं। किसी क्षेत्र विशेष का मामला है तो इस पर खनन अफसर ही कुछ बता या कार्रवाई कर सकते हैं।
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि हिमाचल के लोगों को घर बनाने के लिए खनन सामग्री नहीं मिलती, लेकिन राजनीति और प्रशासनिक शह पर हजारों ट्रक अवैध खनन कर सामग्री पड़ोसी राज्यों में पहुंचाई जा रही है। इस मामले को लेकर विधानसभा में भी सवाल किया गया था, लेकिन पांचवें दिन ही सरकार ने सत्र को समाप्त करा दिया।