प्रदेश में अब आंगनबाड़ी सहायिकाओं और स्कूलों में मिड-डे मील के तहत तैनात वर्कर्स का मेडिकल चेकअप होगा। अगर, मेडिकल चेकअप में गंभीर बीमारी सामने आती है तो वर्कर्स या कार्यकर्ता को दूसरे काम करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। वर्कर्स-कार्यकर्ताएं अपना मेडिकल चेकअप 30 सितंबर तक करवा सकती हैं।
प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों से लिया गया मेडिकल मान्य होगा। इसके बाद सीएमओ कार्यालय में वे अपना पंजीकरण करवा सकती हैं। यह मेडिकल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत हो रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने केंद्रों में पढ़ाई के लिए आने वाले बच्चों के लिए खाना तैयार करती हैं तो वहीं मिड-डे मील योजना के तहत कर्मी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए खाना बनाती हैं।
जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी सहायिकाओं और स्कूलों में मिड-डे मील के तहत तैनात कर्मियों को अब अपने स्वास्थ्य की जांच करवानी होगी। इससे स्पष्ट होगा कि खाना बनाने वाले कर्मी किसी गंभीर बीमारी की चपेट में तो नहीं हैं।
आंगनबाड़ी सहायिकाओं का होगा मेडिकल- सीडीपीओ अनिल कौल ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में तैनात आंगनबाड़ी सहायिकाओं और मिड डे मील वर्करों का एनएफएसए के तहत मेडिकल होगा। यह फैसला स्वच्छ भोजन को लेकर लिया गया है।
कहीं भी करवा सकते हैं मेडिकल- सीएमओ कांगड़ा डॉ. बीएम गुप्ता ने कहा कि आंगनबाड़ी सहायिका और मिडे डे मील वर्कर्स सरकारी अस्पतालों में खून की जांच करवा सकती हैं। इसके बाद सीएमओ कार्यालय में इनका पंजीकरण किया जाएगा।