प्रदेश के स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले 9700 मेधावियों के लिए लैपटॉप की खरीद का मामला आठ अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में जाएगा। निर्धारित बजट बढ़ने और दो कंपनियों को टेंडर देने की पेशकश से मामला उलझ गया है। राज्य इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन से जवाब तलब करने के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने सरकार को मामले की फाइल भेज दी है।
अब सरकार ने तय करना है कि टेंडर अवार्ड किए जाने हैं या रद्द करने हैं। लैपटॉप खरीद के लिए पहली बार दो कंपनियों का चयन किया गया है। एल वन कंपनी को 60 फीसदी और एल टू कंपनी को 40 फीसदी सप्लाई आर्डर देने की बात कही गई है। राज्य इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन ने टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड के बाद दो कंपनियों का चयन किया है।
शिक्षा निदेशालय ने लैपटॉप खरीद के लिए करीब 18 करोड़ का बजट निर्धारित किया है। जबकि टेंडर में चुनी गई कंपनियों ने 23 करोड़ के बजट में लैपटॉप देने की बात कही है। शिक्षा विभाग ने बीते दिनों कारपोरेशन से दो कंपनियों के चयन को लेकर सवाल पूछे थे। इसका जवाब आने के बाद निदेशालय ने मामले की पूरी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेज दी है।
उधर, टेंडर में दिए गए तय मानक पूरे नहीं करने के आरोप में बाहर हुई कंपनी द्वारा उठाए गए सवालों को लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय ने भी कारपोरेशन से जवाब मांगा था। सूत्रों के मुताबिक कारपोरेशन ने सरकार को पूरे मामले से अवगत करवा दिया है। तीसरी कंपनी को बाहर किए जाने के सभी कारण मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव कार्यालय से साझा कर दिए गए हैं।
ऐसे में अब आठ अगस्त को होने वाली कैबिनेट बैठक में ही मेधावियों को मिलने वाले लैपटॉप का भविष्य तय होगा। राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड की साल 2018-19 में हुई परीक्षाओं में दसवीं और जमा दो कक्षा के 8800 और कॉलेजों के 900 मेधावियों को लैपटॉप दिए जाने हैं। साल 2018 में मेधावी विद्यार्थियों को सरकार लैपटॉप नहीं दे सकी थी।