मंदिरों में पशु बलि पर हाईकोर्ट की रोक के बाद जगती पट नग्गर में देव संसद ने अपना फैसला सुना दिया है। शुक्रवार को नग्गर कैसल में फैसला लिया गया कि देव समाज न तो सदियों से चली आ रही किसी प्रथा को छोड़ेंगे और न ही नई प्रथा अपनाएंगे। देव संसद के चलते उमड़ी भीड़ से नग्गर में तिल धरने तक के लिए जगह नहीं थी।
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सुबह 9.30 बजे नग्गर में कुल्लू, मंडी और लाहौल स्पीति के 260 से अधिक देवी देवताओं के हारियान, गूर और देवलु अपने-अपने देवता के प्रतीक चिह्न लेकर पहुंचे। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली देव संसद में सभी देव प्रतिनिधियों ने पूछ के बाद जगटी पट के कारदार को फैसला सुनाया कि वे बलि प्रथा पर उनके साथ हैं।
धर्म संसद में ये भी मत रखा कि देवी देवताओं की बनाई सृष्टि में उन पर ही नियम नहीं थोपे जाने चाहिए। जगती के कारदार महेश्वर सिंह ने बताया कि धर्म संसद में सभी देव प्रतिनिधि बलि प्रथा के पक्ष में हैं। उन्होंने न्यायालय से गुहार लगाई कि वह धर्म संकट में हैं। उन्हें धर्म संसद के फैसले का समान करना पडे़गा। उन्होंने बताया कि दशहरा में परंपरा अनुसार अष्टांग बलि जारी रखने का फैसला लिया गया है।
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जगती पट में 365 देवी-देवता
कुल्लू की प्राचीन राजधानी नग्गर में जगती पट में 365 देवी देवताओं, ऋषि-मुनियों और गंधर्व-किन्नरों का स्थान है। यहां देवता अहम निर्णय लेने के लिए जगती बुलाते हैं। ये चौथी जगती है। देव संसद में तर्क दिया कि कुल्लू दशहरा का शुभारंभ देवी हिडिंबा को अष्टांग बलि देने के बाद होता है। ये प्रथा सदियों से चली आ रही है। उच्च न्यायालय के फैसले से दशहरे पर संकट के बादल छा गए थे।
कौन-कौन से देवी-देवता पहुंचे जगती पट के कारदार और रघुनाथ के छड़ीवरदार महेश्वर सिंह और कुल्लू कारदार संघ के प्रधान दोत राम ठाकुर ने जगती को बुलाया। धर्म संसद में कुल्लू राजघराने की दादी कहे जाने वाली देवी हिडिंबा, राज घराने की कुल देवियां शावर्णी, त्रिपुरा सुंदरी, दोचा मोचा, सहित कुल्लू के अन्य देवता वासुकी नाग, महर्षि जमदागिभन, महर्षि मनु, महर्षि वशिष्ठ सहित सैकड़ों देवी देवताओं ने भाग लिया।
इस बार जगती में पहली बार लाहौल से देवता राजा घेपन, त्रिलोकी नाथ, जाहलमा की देवी हिडिंबा, गुरु घंटाल, काली और मंडी के द्रंग से मां चामुंडा और नारायण देव तथा आउटर सिराज से 12 देवी-देवताओं ने भाग लिया। जगती पट के दौरान जिला प्रशासन भी मौजूद रहा। डीसी
कुल्लू राकेश कंवर खुद मौजूद रहे। डीएसपी पूर्ण चंद और एसएचओ फिरोज खान भी
मौके की नजाकत को देखते हुए डटे रहे। हालांकि, बलि प्रथा पर डीसी राकेश
कंवर ने कहा कि ये देवताओं और कोर्ट का मामला है, इस पर वे कुछ नहीं
कहेंगे।
बलि प्रथा को लेकर देेव समाज की ओर से हाईकोर्ट में दायर पुनर्विचार आवेदन को खारिज कर देव समाज को झटका दे दिया है। उधर, नग्गर में हुई जगती में शामिल करीब पौने तीन सौ देवी-देवताओं ने बलि प्रथा को जारी रखने के आदेश दिए हैं। इस हालात में दशहरा उत्सव में टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। दशहरा जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
हालांकि, जगती में देवी-देवताओं को दशहरा में भाग लेने को कहा गया है। लेकिन, हाईकोर्ट में खारिज पुनर्विचार आवेदन से एक बार फिर दशहरा उत्सव पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। उधर, देव समाज ने दशहरा को लेकर तैयारियां जोरों पर शुरू कर दी हैं। देवरथों को सजाने का काम शुरू हो गया है। अगले दो-तीन दिन में दूरदराज के देवी-देवताओं की रथयात्रा भी शुरू हो जाएगी।
लिहाजा, जिला प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गई है। जिला देवी-देवता कारदार संघ के प्रधान दोत राम ठाकुर ने कहा कि जिला के देवी-देवता दशहरा उत्सव में भाग लेंगे। उन्होंने हाईकोर्ट में खारिज देव समाज के पुनर्विचार आवेदन को लेकर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना किया है।
कहा कि कोर्ट की कॉपी पढ़ने के बाद ही कुछ बोल पाएंगे। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने भी उच्च न्यायालय के फैसले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह पहले कोर्ट के निर्णय की कॉफी को स्टडी करेंगे।