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मेडीपर्सन एक्ट में पहला मामला दर्ज, डॉक्टर से की गाली-गलौज

Thu, 01 Mar 2018 12:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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आईजीएमसी में बच्चे का इलाज करने पहुंचे पिता पर कॉलेज प्रबंधन ने मेडी पर्सन एक्ट में थाना सदर में मुकदमा दर्ज करवाया है। डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए वजूद में आए इस एक्ट के तहत प्रदेश में यह पहला मामला है। आरोप है कि उन्होंने ड्यूटी पर तैनात एक जूनियर रेजिडेंट डाक्टर के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की।

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बुधवार सुबह दोनों पक्ष पुलिस के पास पहुंचे और अपना-अपना पक्ष रखा। बुधवार शाम आईजीएमसी प्रिसिंपल की ओर से एफआईआर दर्ज करवाने का शिकायत पत्र भेजा गया। इस आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक आईजीएमसी में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर और बच्चे के अभिभावक  के बीच इलाज को लेकर कुछ विवाद हुआ।

डॉक्टर ने अभिभावक पर गाली गलौज का आरोप लगाया। घटना  बुधवार  सुबह 4.30 बजे की है। टूटीकंडी के रहने वाले एक व्यक्ति के तीन साल के बेटे को उल्टियां हो रहीं थीं। इलाज के लिए बच्चे को आईजीएमसी लाया गया।
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डाक्टरों का दावा है कि यहां पर चिकित्सक ने बच्चे को देखा। बताया जा रहा है कि इसी दौरान एक और बीमार बच्चा अस्पताल आ गया। चिकित्सक इस बच्चे का भी स्वास्थ्य जांचने लगे।

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क्या है मेडी-पर्सन एक्ट

इस पर पहले से उपचाराधीन बच्चे के पिता ने आपत्ति जता दी। इसी दौरान दोनों पक्षों में बहस हो गई। हाथापाई तक नौबत आने से पहले पिता को पकड़ कर बाहर ले जाया गया।

रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे माहौल में इमरजेंसी में काम करना मुश्किल हो गया है। उधर, एएसपी सिटी प्रवीर ठाकुर ने कहा कि कालेज प्रबंधन की शिकायत के आधार पर मेडी पर्सन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर छानबीन की जा रही है। 

आईजीएमसी आरडीए के महासचिव डॉक्टर विशाल जम्वाल ने बताया कि रात के समय इस तरह की घटनाएं डॉक्टरों के साथ न हों इसके लिए रात्रि सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए।

आईजीएमसी के डिप्टी एमएस डॉ. राहुल राव ने बताया कि सुबह करीब साढ़े चार बजे अपने बच्चे को लेकर एक पिता पहुंचे। उस समय डाक्टर मरीज की जांच कर रहे थे। रेजिडेंट डाक्टर ने अभिभावक से कहा कि आपका बच्चा नार्मल है।

गंभीर हालत वाले मरीज को देखने के बाद वे आपके बच्चे को देखेंगे। इसी पर अभिभावक ने डाक्टर के साथ हाथापाई शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल के प्रिंसिपल की ओर से पुलिस को शिकायत दे दी गई है।

मेडी-पर्सन एक्ट के तहत स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों से झगड़ा करने या हिंसा को गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक जेल हो सकती है।

नए कानून का दुरुपयोग न हो इसके लिए पुलिस को अस्पताल प्रमुख के माध्यम से ही शिकायत करने का प्रावधान किया गया है। कोई भी डॉक्टर सीधे शिकायत नहीं कर सकता।
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