इस पर पहले से उपचाराधीन बच्चे के पिता ने आपत्ति जता दी। इसी दौरान दोनों पक्षों में बहस हो गई। हाथापाई तक नौबत आने से पहले पिता को पकड़ कर बाहर ले जाया गया।
रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे माहौल में इमरजेंसी में काम करना मुश्किल हो गया है। उधर, एएसपी सिटी प्रवीर ठाकुर ने कहा कि कालेज प्रबंधन की शिकायत के आधार पर मेडी पर्सन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर छानबीन की जा रही है।
आईजीएमसी आरडीए के महासचिव डॉक्टर विशाल जम्वाल ने बताया कि रात के समय इस तरह की घटनाएं डॉक्टरों के साथ न हों इसके लिए रात्रि सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए।
आईजीएमसी के डिप्टी एमएस डॉ. राहुल राव ने बताया कि सुबह करीब साढ़े चार बजे अपने बच्चे को लेकर एक पिता पहुंचे। उस समय डाक्टर मरीज की जांच कर रहे थे। रेजिडेंट डाक्टर ने अभिभावक से कहा कि आपका बच्चा नार्मल है।
गंभीर हालत वाले मरीज को देखने के बाद वे आपके बच्चे को देखेंगे। इसी पर अभिभावक ने डाक्टर के साथ हाथापाई शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल के प्रिंसिपल की ओर से पुलिस को शिकायत दे दी गई है।
मेडी-पर्सन एक्ट के तहत स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों से झगड़ा करने या हिंसा को गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक जेल हो सकती है।
नए कानून का दुरुपयोग न हो इसके लिए पुलिस को अस्पताल प्रमुख के माध्यम से ही शिकायत करने का प्रावधान किया गया है। कोई भी डॉक्टर सीधे शिकायत नहीं कर सकता।