राजधानी शिमला में सरकारी, अर्ध सरकारी और निजी भवनों की छतों को लाल या हरे रंग से रंगना अनिवार्य कर दिया है। बुधवार को हाईकोर्ट के आदेशानुसार नगर निगम ने यह फरमान जारी किया है। नगर निगम के सभी कनिष्ठ अभियंताओं को वार्डों से बिना रंग की छतों का डाटा जुटाने के निर्देश दिए हैं।
छतों को रंगने के लिए नगर निगम भवन मालिकों को नोटिस जारी करेगा। अगर नोटिस के बाद भी भवन मालिकों ने छतों को लाल या हरे रंग से नहीं रंगा तो ऐसे लोगों के नामों की सूची नगर निगम हाईकोर्ट को सौंपेगा। नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शहर के भवनों में एकरूपता लाने और सुंदरता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।
हाईकोर्ट ने त्रिशा शर्मा बनाम राज्य सरकार केस के मामले में राजधानी शिमला में भवनों की छतों को लाल या हरे रंग से रंगने के आदेश दिए थे। नगर निगम के बिल्डिंग बॉयलाज 1998 के 41.7 के तहत भी छतों को रंगने का उल्लेख है। ऐसे में जो भवन मालिक छतों में रंग नहीं करवाएगा, उसके खिलाफ एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। छतों को नहीं रंगने वालों पर हाईकोर्ट की अवमानना का केस भी चलेगा। इस कार्रवाई के तहत भवन मालिकों को सिर्फ जुर्माना लगाकर नहीं छोड़ा जाएगा।
योजनाकार लेंगे भवनों का जायजा
नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने बताया है कि सरकारी और अर्ध सरकारी भवनों का जायजा वास्तुक योजनाकार केएस चौहान लेंगे। निजी भवनों की लिस्ट कर शाखा के सचिव डा. दीवान चंद बनाएंगे। एक सप्ताह के भीतर नगर निगम नोटिस देना जारी कर देगा।