नवबहार में सरकारी भूमि पर कब्जा करने के मामले में घिरे राज्य के पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास के सिर्फ दो ही गवाह सोमवार को सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर के कोर्ट में पेश हुए।
बतौर गवाह पेश हुए कानूनगो सेटलमेंट वीर सेन नेगी ने कहा है कि जब उन्होंने मकान की नपाई की थी तो पूर्व डीजीपी ने बाहरी दीवार का निर्माण नहीं किया था।
ऐसे में सरकारी भूमि पर कब्जा करने का मामला उस समय नहीं बनता था। इसीलिए उन्होंने सरकारी भूमि पर कब्जा नहीं होने का प्रमाणपत्र दिया था। कानूनगो की इस गवाही से पूर्व डीजीपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सोमवार को कोर्ट में कानूनगो के अलावा एक और गवाह देवी लाल ने भी गवाही दी। पूर्व डीजीपी की ओर से पांच गवाहों की सूची नगर निगम को दी गई थी। सोमवार को पांच गवाहों में से सिर्फ दो ही गवाह पेश हुए।
तीन गवाहों को भेजे जाएंगे समन
शेष तीन गवाहों को अब सहायक आयुक्त कोर्ट की ओर से दस्ती समन भेजे जाएंगे। दस्ती समन के तहत पूर्व डीजीपी को स्वयं इन गवाहों को नगर निगम तक पहुंचाना होगा। 25 जून को इन गवाहों की पेशी होगी।
बताया जा रहा है कि एक गवाह सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार भान सिंह को समन प्राप्त ही नहीं हुआ है। इनका पता सही नहीं निकला है। इसके अलावा गवाह एनएल पोपली और रिकॉर्ड रूम शिमला के अधिकृत प्रभारी पेश नहीं हुए।
रिकॉर्ड रूम से अनिल विश्वास बनाम परमिंद्र हीरा की फाइल कोर्ट में पेश करने को कहा गया है। पूर्व डीजीपी पर 959 वर्ग मीटर की बाउंड्री वॉल नगर निगम की भूमि पर बनाने का आरोप है।