सिरमौर जिले के धारटीधार क्षेत्र के शहीद जवान प्रशांत सिंह ठाकुर का पार्थिव शरीर गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। सुबह देहरादून से शव को उनके पैतृक घर पहुंचाया गया।
तिरंगे में अपने पोते को लिपटा देख 66 वर्षीय दादी गीता देवी अपना सीना पीट-पीट कर रोने लगी। जिस आंगन में उसने अपने पोते को उंगली पकड़ कर चलना सिखाया था उसी आंगन मे आज उसका शव कफन मे लिपटा पड़ा हुआ था।
पिछले दो दिनों से शव की प्रतीक्षा में पथरा चुकी आंखों से आंसू भी मोती की तरह बह रहे थे। सेना के अधिकारियों ने प्रशांत ठाकुर के शव को पहले उनके घर तक पहुंचाया। उसके पश्चात शव को अंतिम संस्कार के लिए गिरी नदी किनारे डाबरा गांव ले जाया गया। सुबह से ही लोग शहीद के निवास स्थान पर उसके अंतिम दर्शनों के लिए जुटना शुरू हो गए थे।
सोमवार रात को कशमीर के बारामुला मे आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए प्रशांत ठाकुर का दूसरा साथी रवि कुमार सिंह भी पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर का रहने वाला था। सेना की ओर से दोनों जवानों के पार्थिव शरीर को बुधवार रात्रि को ही श्रीनगर से देहरादून पहुंचा दिया गया था। गुरुवार सुबह 10 बजे के करीब देहरादून से सैनिक सम्मान के पश्चात शवों को सैनिकों के घरों के लिए रवाना किया गया।