कोरोना महामारी के चलते पवित्र मणिमहेश यात्रा महज रस्मों तक ही सीमित रह गई हैं। प्रशासनिक अनुमति के आधार पर चेले, शिव गूर और चंद लोग ही यात्रा के गवाह बन पा रहे हैं।
पवित्र मणिमहेश यात्रा के दौरान होने वाले छोटे शाही स्नान के इस मर्तबा चंद श्रद्धालु ही साक्षी बन पाए हैं। ये जिला और स्थानीय प्रशासन से अनुमति के बाद ही मणिमहेश पहुंचे थे। वहीं, पड़ोसी राज्य जम्मू कश्मीर से पवित्र मणिमहेश यात्रा पर अपने देव चिह्न लेकर पहुंचे श्रद्धालु सोमवार को पवित्र डल में डुबकी लगाकर लौट गए। इसके अलावा पवित्र डल में गंगाजल डालने वाले श्रद्धालु भी लौट आए।
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कोरोना महामारी के चलते पवित्र मणिमहेश यात्रा महज रस्मों तक ही सीमित रह गई हैं। प्रशासनिक अनुमति के आधार पर चेले, शिव गूर और चंद लोग ही यात्रा के गवाह बन पा रहे हैं। रविवार देर रात 11 बजकर 24 मिनट पर जन्माष्टमी स्नान का शुभारंभ हुआ। इस दौरान चंद लोगों ने ही शुभ मुहूर्त में पवित्र डल में डुबकी लगाई। रविवार देरशाम पवित्र मणिमहेश कैलाश पर्वत व डलझील पर दो इंच के करीब ताजा हिमपात हुआ है।
अपनी दादी की मृत्यु के बाद गंगा जल डालने मणिमहेश गए सुमित कुमार, मनु शर्मा ने बताया कि प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद देर शाम मणिमहेश पहुंचे। सोमवार तड़के पवित्र डल में गंगा जल डालने के बाद वह लौट आए तथा दोपहर को भरमौर पहुंच गए। अब छोटे शाही स्नान के शुभ मुहूर्त के साथ ही पवित्र मणिमहेश यात्रा का आगाज हो गया है।