उनकी गोशाला में साहीवाल नस्ल की 25 गायें हैं। एमबीए करने के बाद ऋषि डोगरा ने विभिन्न कंपनी में नौकरी की। उसके बाद निजी स्कूल में बतौर प्रधानाचार्य सेवाएं दीं, लेकिन मन ऊब जाने के बाद गाय पालन का काम शुरू किया है। पिछले एक साल में ही 25 साहीवाल गाय को पालकर दूध, घी, गोमूत्र अर्क और गोमूत्र से तैयार बिना केमिकल के फर्श क्लीनर से अपनी आजीविका कमाना शुरू कर दी है। ऋषि डोगरा ने कहा कि ऐसा करने की सोच मन में तब उत्पन्न हुई, जब उन्होंने गाय का निरादर होता देखा। उन्होंने सोचा क्यों न गोसेवा की जाए। इससे उनकी आय के साधन भी बनेंगे।