हिमाचल प्रदेश में मैगी की गुणवत्ता फेल पाई गई है। ऊना जिले के टाहलीवाल कंपनी से लिए गए मैगी के दो सैंपल फेल होने की रिपोर्ट आ चुकी है। सैंपल में मानक से अधिक मात्रा सीसा (लेड) की पाई गई है।
हालांकि देश भर में पहले ही मैगी की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया है। ऐसे में प्रदेश सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय के निदेशक रामेश्वर शर्मा ने बताया हिमाचल प्रदेश में 72 सैंपल मैगी के लिए गए थे।
इनमें से 34 नमूने टाहलीवाल में नेस्ले इकाई से लिए गए थे। इनमें से मैगी के दो नमूने फेल पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार मैगी में सीसे की अधिकतम मात्रा 2.2 पीपीएम होने चाहिए, लेकिन जांच रिपोर्ट में मैगी के नमूनों में 4.4 पीपीएम पाई गई है।
ऐसे में सीधे तौर पर 2.2 पीपीएम सीसा की मात्रा अधिक रही है। इससे सीधे तौर पर मैगी खाने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा था। शर्मा ने कहा कि धीरे धीरे अन्य जांच रिपोर्टें भी आ रही है।