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रविवार के दिन प्रकट हुई थी मां ज्वाला?

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प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार आज मां ज्वाला के ‘प्रकटोत्सव’ मनाया जा रहा है।
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मान्यता है कि मां ज्वाला इसी दिन इस स्थान पर ज्योति के रूप में प्रकट हुई थीं। ‘प्रकटोत्सव’ के दौरान मंदिर के पुजारियों की ओर से विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा है।

मंदिर को श्रद्धालुओं ने एक हजार क्विंटल फूलों से सजाया है। आज ही के दिन नौ दिन तक चले गुप्त नवरात्र का भी महायज्ञ एवं कन्या पूजन के साथ समाप्त हो जाएंगे। इस आयोजन को देखने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ आई है।
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चढ़ाया गया 300 किलो देसी घी का प्रसाद

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं को मां के दर्शनों के लिए परिक्रमा मार्ग से भेजा जाएगा। पुजारी महासभा के प्रधान एवं मंदिर ट्रस्ट प्रधान दिव्यांशु भूषण, मंदिर न्यास सदस्य सुरेंद्र काकू, पवन शर्मा, बेनी माधव, पार्वती शर्मा, प्रेमानंद, संजीव सूद और धर्मपाल शर्मा का कहना है कि हर वर्ष की भांति इस बार भी मां ज्वाला का ‘प्रकटोत्सव’ धूमधाम से मनाया जा रहा है।

मंदिर में श्रद्धालुओं को मंदिर न्यास की ओर से 300 किलो देसी घी के हलवे का प्रसाद बांटा जाएगा। सहायक मंदिर आयुक्त एवं एसडीएम विनय कुमार का कहना है कि मां ज्वाला के ‘प्रकटोत्सव’ के आयोजन को सफल बनाने का जिम्मा मंदिर अधिकारी देवी राम को सौंपा गया है।
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51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि है मां ज्वाला

कांगड़ा घाटी स्थित ज्वालामुखी शक्तिपीठ की मान्यता 51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि मानी गई है। इन पीठों में यही एक ऐसा शक्तिपीठ है, जहां मां के दर्शन साक्षात ज्योतियों के रूप में होते हैं।

शिव महापुराण में भी इस शक्तिपीठ का वर्णन आता है। जब भगवान शिव जल रही माता सती को अग्निकुंड से निकालकर पूरे ब्रह्मांड में घूम रहे थे तो भगवान विष्‍णु के सुदर्शन चक्र से कटकर सती की जीव्हा इस स्थान पर गिरी थी। इससे यहां ज्वाला ज्योति रूप में यहां दर्शन देती हैं।
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