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पांच-पांच रुपये में भरपेट खाना खा रहे 500 वर्कर, उद्योगपति ने की पहल

Mon, 29 Apr 2019 10:28 AM IST
अरविन्द ठाकुर संजय भारद्वाज, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
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- फोटो : अमर उजाला
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महंगाई के इस जमाने में पांच रुपये में भरपेट खाना तो दूर चाय की प्याली भी नहीं मिल पाती, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब (सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) में एक ऐसी कैंटीन खुली है, जहां पांच रुपये में भरपेट खाना मिल रहा है। औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत मजदूरों और कर्मचारियों के लिए यह कैंटीन सहारा बन गई है। उद्योगपति संजय सिंगला की इस पहल के चलते हर रोज 500 से अधिक लोग यहां खाना खा रहे हैं। संजय सिंगला कालाअंब में फार्मा उद्योग चला रहे हैं। 

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कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में लगी 200 से अधिक औद्योगिक इकाइयों में सैकड़ों मजदूर और कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। दोपहर का भोजन पहले कर्मचारी साथ लेकर आते थे। कई युवा मजदूर अकेले रहते हैं तो कइयों का पूरा परिवार उद्योगों में कार्यरत है। बाहरी राज्यों से आकर कार्य कर रहे मजदूर कई बार साथ में भोजन भी लेकर नहीं आ पाते। 

ऐसे में उद्योगपति सिंगला की यह कैंटीन इनके लिए सहारा बन गई है। साफ-सुथरी कैंटीन में महज पांच रुपये में चावल और एक दाल दी जा रही है। हर रोज कैंटीन के भोजन का मेन्यू भी बदला जाता है। कभी राजमा, कभी मलका तो कभी कड़ी के साथ चावल परोसे जाते हैं। खास बात यह है कि कैंटीन सिर्फ उद्योगों में कार्यरत लोगों के लिए ही नहीं है। कोई भी आकर यहां खाना खा सकता है।

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पांच रुपये क्यों रखा खाने का रेट

खाने का रेट महज पांच रुपये ही रखा गया है। खर्चा इससे कहीं अधिक आता है। संजय सिंगला ने बताया कि मजदूरों के आत्म-सम्मान के लिए यह राशि रखी गई है। यहां खाना खाकर कोई यह नहीं कह सकेगा कि यहां मुफ्त में खाना खाकर जा रहे हो। मजदूर भी कह सकते हैं कि वह पैसे देकर खाना खा रहे हैं। 

कहां पर है कैंटीन
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में त्रिलोकपुर सड़क के समीप ही भीतर के मार्ग पर यह कैंटीन चल रही है। फार्मा उद्योग चलाने वाले संजय सिंगला इसका संचालन कर रहे हैं। कई बार वह स्वयं भी यहां खाना परोसने आ जाते हैं। मजदूर अपनी थालियां लेकर स्वयं आते हैं। यहां लाइनों में खड़ा होकर पांच रुपये देते हैं और खाना ले लेते हैं। कई लोग टिफिन भरकर भी घर ले जाते हैं।
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