अब सादे प्रचार का दौर नहीं, नेता और वोटर दोनों चालाक
हमीरपुर जिले के अणु निवासी 102 वर्षीय जफर राम का कहना है कि अब चुनाव का दौर बदल चुका है। प्रचार करने के तरीके बदल गए हैं। अब नेता के साथ वोटर भी चालाक है। पहले सार्वजनिक कार्यों और समाज के हितैषी नेता को देखकर वोट करते थे। अब व्यक्तिगत कार्यों को तवज्जो दी जा रही है। पहले वाला सादा प्रचार-प्रसार भी अब नहीं है। अब आबादी भी बढ़ गई है और राजनीतिक दल भी बढ़ गए हैं। लगभग हर चुनाव में वोट डाला है। इस उम्र में भी मतदान केंद्र तक वोट डालने के लिए पैदल जाता हूं।
अब वोट डालने को लेकर पहले की तरह लोगों में आपसी चर्चा नहीं होती है। मतदान से पहले गांव में चौपाल सजती थी और लोग आपस में गपशप करते थे। चुनाव में मतदान को लेकर भी चर्चा होती थी। परिवार और गांव एक होकर वोटिंग के लिए निर्णय लेते थे। अब बदलते दौर में एक परिवार में ही अलग-अलग पार्टियों व नेताओं को वोट डाले जा रहे हैं। परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के वोट के बारे में मालूम नहीं होता है। कौन किसे वोट दे रहा है, यह अब कम ही साझा किया जाता है। पहले वोट की चर्चा खुलेपन में होती थी।