मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर
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दिल्ली में जहां पहले पंडित सुखराम और वीरभद्र सिंह गले मिले थे, उससे यह प्रतीत हो रहा था कि दोनों दिग्गजों ने पुराने राजनीतिक मतभेद भुला दिए हैं लेकिन अब वीरभद्र सिंह के बयान से संकेत कुछ और मिले हैं। भले ही दोनों वरिष्ठ नेताओं ने हाथ मिलाकर एक दूसरे को गले लगाया, मगर दोनों के मनभेद अभी मिटे नहीं हैं। पिछले दिनों वीरभद्र सिंह के इस बयान में पंडित सुखराम को ‘आया राम और गया राम’, जबकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ईमानदार नेता बताया गया है।
वीरभद्र सिंह ने सुखराम को फिर से कांग्रेस में शामिल होने के मामले में बताया कि यह फैसला हाईकमान का है, इस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पंडित सुखराम अनुशासनहीनता करते हैं, वह आते-जाते रहे हैं। वह ‘आया राम और गया राम’ हैं, मैं पसंद नहीं करता। सुखराम का परिवार के प्रति प्रेम रहा है, कब किसे उठाया जाए, वह ताक में रहते हैं। जयराम ठाकुर हिमाचल में विकास करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में चारों सीटों में से दो पर कांग्रेस की जीत सुनिश्चित है।
अभी तक मंडी संसदीय क्षेत्र में पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुखराम और कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की चिंता बढ़ाई थी। जिस दिन आश्रय को टिकट मिला है, उसी दिन से जयराम ठाकुर दादा और पोते पर हमला करने से नहीं चूके। लेकिन वीरभद्र सिंह की ओर से जारी बयान ने जयराम ठाकुर की चिंता कम कर दी है।