हिमाचल के एमएसएमई उद्योगों को केंद्र ने बड़ी राहत दी है। प्रदेश में करीब 95 फीसदी उद्योग इसी श्रेणी में आते हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र ने एमएसएमई को डिफाल्टर ऋण के रूप में वर्गीकृत करने और छूट देने की घोषणा की है। इससे एमएसएमई के खिलाफ अगले एक साल के लिए दिवालिया होने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
सीएम ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए एक नई नीति लाने का प्रस्ताव है, जिसमें सभी क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोला जाएगा। इससे राज्य के खराब स्थिति वाले सार्वजनिक उपक्रमों को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से राज्यों की उधार सीमा जीएसडीपी को तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने के निर्णय का भी स्वागत किया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से आत्मनिर्भर भारत अभियान के पांच चरण की घोषणाओं का भी सीएम ने स्वागत किया। सीएम ने मनरेगा के तहत बजटीय आवंटन बढ़ाने का स्वागत करते हुए कहा कि वर्ष 2020-21 के लिए आवंटित बजट 61,000 करोड़ रुपये के प्रावधान में 40,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है। यह प्रदेश के लोगों को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।