देव महाकुंभ कुल्लू दशहरा में बेटियों को बचाने के लिए एक साथ करीब नौ हजार महिलाएं नाचीं। इस अनोखे कार्यक्रम के हजारों लोग गवाह बने। खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दाएं हाथ में तलवार पकड़कर महिलाओं के साथ नाटी डाली। प्राइड ऑफ कुल्लू नाम के इस आयोजन को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने की दावेदारी भी पेश की गई है।
बाकायदा इस कार्यक्रम में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। महिलाओं ने पारंपरिक कुल्लवी परिधानों में न केवल सामूहिक नृत्य किया बल्कि बेटी बचाने की शपथ भी ली। इस आयोजन से दशहरा कमेटी ने समाज को एक संदेश देने का प्रयास किया। कार्यक्रम में उत्साह का आलम ये रहा कि पांच हजार महिलाओं के सामूहिक नृत्य के लक्ष्य से आगे जाकर करीब नौ हजार महिलाओं ने इसमें हिस्सा लिया।
ढालपुर के रथ मैदान में तिल धरने को भी जगह नहीं बची। अठारह करडू़ की सोह ढालपुर मैदान में देवताओं की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में रंग-बिरंगे परिधानों में 15 साल की लड़कियों से लेकर 70 साल तक की बुजुर्ग महिलाओं ने हिस्सा लिया। उपायुक्त एवं दशहरा मेला कमेटी के अध्यक्ष राकेश कंवर ने कहा कि इससे पहले तीन हजार महिलाओं का एक साथ नृत्य करने का रिकॉर्ड है।
उन्होंने दावा किया कि इस नृत्य को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में स्थान मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम में पांच हजार महिलाओं को जुटाने का लक्ष्य था। लेकिन उम्मीद से अधिक महिलाओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पंजीकृत महिलाओं की संख्या 8,760 लेकिन वास्तव में महिलाएं नौ हजार से अधिक थीं।
सीएम ने दिलाई बेटी बचाओ की शपथ
कुल्लू कला केंद्र में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने महिलाओं को बेटी बचाओ की शपथ दिलाई। उन्होंने इस आयोजन की जमकर तारीफ की और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की बात कही। शपथ दिलाने के बाद सीएम ने हरी झंडी दिखाकर महिलाओं को रथ ग्राउंड की ओर रवाना किया।
रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार एवं कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह ने सामूहिक लोक नृत्य का नेतृत्व किया। रघुनाथ के कारदार, बंजार के विधायक कर्ण सिंह, लाहौल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर, आनी के विधायक खूब राम आनंद ने भी नाटी में हिस्सा लिया।
घर का कामकाज छोड़ ढालपुर पहुंची महिलाएं
प्राइड फॉर कुल्लू के नाम से आयोजित सबसे बडे़ लोक नृत्य में 5000 हजार महिलाओं और लड़कियों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन महिलाओं में इस नाटी को लेकर इतना अधिक उत्साह दिखा कि इसमें करीब 8760 हजार महिलाओं ने भाग लिया। कुल्लू दशहरा में आयोजित इस ऐतिहासिक, सामूहिक लोकनृत्य में छात्राओं से लेकर महिला अधिकारियों ने भी शिरकत की।
महिलाएं घर का कामकाज छोड़ कुल्लवी पट्टू और ढाठू में ढालपुर मैदान पहुंची। कार्यक्रम को लेकर जहां शहर की महिलाओं ने रुचि दिखाई, वहीं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में भी जोश दिखा। महिलाओं के सम्मान में हुए इस कार्यक्रम को महिलाओं ने खूब सराहा। मनाली के जगतसुख गांव की दिव्या शर्मा, राजेश्वरी, सोमा देवी और ममता ने बताया कि यह आयोजन कुल्लू के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि इतनी अधिक संख्या में जिला के कोने-कोने से महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से नारी शक्ति की ताकत का अंदाजा हो गया है। उन्होंने कहा कि नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। वहीं, मणिकर्ण घाटी की देवकला देवी, भीमा देवी, बंजार की सुखदासी और सेवती देवी ने कहा कि यह दशहरे में पहली बार हुआ है कि इतनी अधिक संख्या में महिलाएं नाटी डालने के लिए एक साथ इकट्ठा हुई।
उन्होंने कहा कि लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में प्राइड फार कुल्लू का यह इंवेट अगर शामिल हो जाता है। तो कुल्लू ही नहीं पूरे हिमाचल के लिए गौरव की बात होगी। उन्होंने कहा कि वह अपने सारे कामकाज छोड़कर इस आयोजन में शामिल होने पहुंची है।