हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एलआईसी एजेंट आनंद चौहान की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष दोनों पक्षों की जिरह पूरी होने पर फैसला सुरक्षित रखा गया है। अदालत ने कहा कहा वे जल्द ही अपना निर्णय देंगे।
याची ने निचली अदालत के 20 अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। ईडी ने 9 जुलाई को आनंद चौहान को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था। ईडी के अनुसार उसके पास चौहान के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। वहीं आनंद के अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल को फर्जी तरीके से फंसाया गया है।
उन्होंने कहा यह एक राजनीति मामला है और उसी के आधार पर दर्ज किया गया है। इसके अलावा मामले में जांच पूरी हो चुकी है। ऐसे में जमानत प्रदान की जाए। आरोप है कि यूपीए सरकार में मंत्री रहते हुए वीरभद्र सिंह द्वारा अर्जित किए गए काले धन को ठिकाने लगाने में आनंद चौहान ने अहम भूमिका निभाई थी। वीरभद्र सिंह ने आनंद चौहान के माध्यम से छह करोड़ रुपये की रकम को अपने व परिवार के सदस्यों के नाम एलआईसी में निवेश किया था।