एबीवीपी के संगठन मंत्री कौल नेगी ने कहा कि रूसा सिस्टम बिना तैयारी से लागू किया गया है। इसके चलते सिलेबस हर साल बदला जा रहा है। विद्यार्थी परिषद जूठन उपन्यास को छठे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम से हटाने की मांग मुखर करेगी।
एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सुरजीत भरमौरी ने कहा कि देश को बांटने वाले पाठ्यक्रम बदलने की मांग की जाएगी। देश को जाति आधार पर बांटने वाला पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाने दिया जाएगा।
छठे सेमेस्टर में पढ़ाई जा रही जूठन शीर्षक से पुस्तक ओमप्रकाश वाल्मीकि के उपन्यास का अनुवाद है। वाल्मीकि का आजादी से पहले ही वर्ष 1913 में देहांत हो गया था। उपन्यास में ओमप्रकाश वाल्मीकि ने सवर्ण के पिछड़ी जातियों पर लागू अघोषित कानूनों के बारे में बताया है।
समाज में उनके साथ अपनाए गए भेदभाव वाले रवैये की बातें भी बताई गई हैं। पाठ्यक्रम में शामिल करने के बावजूद अनुवादित पुस्तक में जाति सूचक शब्दों को नहीं हटाया गया है।
हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरदेव ने कहा कि उनके ध्यान में मामला सामने आया है। इसकी जांच करवाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर पाठ्यक्रम को हटाया जाएगा।