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शहर में तेंदुए की दहशत से डरे लोग

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वन विभाग खाली पिंजरे लगाकर निभा रहा औपचारिकताएं, लोग उठा रहे सवाल
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कनलोग से भी एक बच्ची को उठा ले गया था तेंदुआ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के रिहायशी इलाकों में तेंदुए के घूमने की घटनाओं से शहरवासी दहशत में हैं। खाली पिंजरे लगाकर तेंदुए पकड़ने की वन विभाग की मुहिम देखकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। शहर में इसी साल तेंदुए के दिखने और हमला करने की दो दर्जन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं।
इसके बावजूद वन विभाग एक भी तेंदुए को पकड़ नहीं पाया है। शहर के कनलोग में पांच अगस्त को तेंदुए ने छह साल की बच्ची को उठा लिया था। दूसरे दिन बच्ची के अवशेष जंगल में मिले थे। आज तक इस आदमखोर तेंदुए का भी कोई पता नहीं चला। वन विभाग ने कुछ दिन तो पिंजरा लगाया, फिर बाद में खाली रखकर छोड़ दिया। कुछ महीने पहले कृष्णानगर में पालतू कुत्ते का शिकार करने आए तेंदुए ने घर में घुसकर तेंदुए ने एक युवक को लहूलुहान कर दिया था।
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तेंदुए को युवक ने कमरे में बंद किया तब जाकर वन विभाग इसे पकड़ा। विकासनगर, समिट्री, कनलोग, खलीनी और फागली आदि इलाकों में भी आए दिन तेंदुए के रिहायशी इलाकों में घूमने तथा कुत्तों का शिकार करने की शिकायतें आ चुकी हैं। लेकिन आज तक कोई तेंदुआ पकड़ में नहीं आ रहा। वन विभाग सिर्फ लोगों को रात के समय अलर्ट रहने को कह रहा है। कसुम्पटी पार्षद राकेश चौहान ने कहा कि राजधानी में ही तेंदुआ दहशत मचा रहा है। विभाग के लिए लोगों की जान से ज्यादा जानवर प्यारे हैं। दिन में बंदर परेशान कर रहे हैं तो रात को तेंदुआ जान ले रहा है।
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जंगल से सटे रिहायशी
इलाकों की हो फेंसिंग
शहर में जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में तेंदुए के घूमने की सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में लोग इन इलाकों में जंगल की फेंसिंग करने की भी कई बार मांग उठा चुके हैं। कनलोग में हुई घटना के बाद लोगों ने इस मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। अब फागली पार्षद जगजीत बग्गा का कहना है कि जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में फेंसिंग होनी चाहिए।
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