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खूंखार तेंदुआ: पिंजरे के गेट पर मांस लटका देखकर भी जंगल में लौट गया

Fri, 12 Nov 2021 01:09 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

पिंजरे के आसपास तेंदुए की मूवमेंट हुई है या नहीं, इसके लिए पिंजरे के बाहर ताजी नरम मिटटी बिछाई है। वन विभाग के अनुसार रात को तेंदुआ यहां आया था। पिंजरे के बाहर जो मिट्टी बिछी थी सुबह वहां तेंदुए के पंजों के कई निशान मिले हैं।
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डाउनडेल के जंगल में लगाया पिंजरा। तेंदुआ मांस देखकर भी पिंजरे में नहीं जा रहा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी शिमला के रिहायशी इलाकों में आकर मासूम बच्चों को अपना शिकार बना रहा तेंदुआ पकड़ने के लिए लगाए पिंजरों के गेट के पास से वापस लौट गया। इसने पिंजरे में रखा मांस देखा और पिंजरे के चारों ओर घूमने के बाद वापस चला गया।

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यहां पिंजरा कनलोग के साथ लगते जंगल में लगाया गया है। पिंजरे के आसपास तेंदुए की मूवमेंट हुई है या नहीं, इसके लिए पिंजरे के बाहर ताजी नरम मिटटी बिछाई है। वन विभाग के अनुसार रात को तेंदुआ यहां आया था। पिंजरे के बाहर जो मिट्टी बिछी थी सुबह वहां तेंदुए के पंजों के कई निशान मिले हैं। यह निशान काफी बड़े हैं। विभाग ने इसके निशान सुबूत के तौर पर रख लिए हैं। 

पंजों के बड़े निशान देखकर माना जा रहा है कि यह बड़ा तेंदुआ है। वन विभाग के अनुसार तेंदुए और कुत्तों के पंजों के निशान अलग होते हैं। ऐसे में बड़े पंजे के यह निशान तेंदुए के ही हैं। वन विभाग तेंदुए को पकड़ने के अभियान के तहत इसे एक छोटी कामयाबी मान रहा है। विभाग का कहना है कि तेंदुए ने अपना शिकार देख लिया है।
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ऐसे में यह यहां जरूर आएगा। विभाग की टीम ने वीरवार को इस पिंजरे को और बेहतर तरीके से लगाया है। उम्मीद जताई जा रही है कि एक दो दिन के भीतर तेंदुआ पकड़ में आ जाएगा। इसलिए इसे अभी मारने या आदमखोर घोषित करने पर भी फैसला टाल दिया है। विभाग का कहना है कि अभी तेंदुए को जिंदा पकड़ने के ही प्रयास हैं।

पीसीसीएफ अजय श्रीवास्तव ने बताया कि तेंदुए की मूवमेंट पिंजरे के बाहर मिली है। इसके पंजे के निशान मिले हैं। तेंदुआ यहां आया था लेकिन यह पिंजरे के अंदर नहीं गया। उम्मीद है अब जल्द ही यह पकड़ में आ सकेगा। विभाग ने जंगल में कई जगह कैमरे और पिंजरे लगा रखे हैं। 

बंदरों की तरह शहरी इलाके में चालाक हो गया तेंदुआ
शहरी इलाकों में बंदरों की तरह अब तेंदुआ भी चालाक हो गया है, जो शिकार आसानी से मिल रहा हो, उसके लिए कई बार तेंदुआ एकाएक नहीं झपटता। शिकार करने से पहले तेंदुआ पूरी रैकी करता है। यदि इसे खुद के लिए खतरा लगता है तो यह हमला नहीं करता। शिकार को देखने के बाद पूरी तरह से आश्वस्त होने पर ही तेंदुआ शिकार करता है। वन विभाग भी मानता है कि तेंदुआ अब पहले जैसा नहीं है। यह चालाक हो गया है। शहरी इलाकों में घूमने से इसके शिकार और शिकार करने की आदतों में बदलाव आया है।

केमिकल रिपोर्ट में होगा मौत के कारणों का खुलासा
राजधानी के डाउनडेल इलाके से 4 नवंबर को दिवाली की रात अचानक गायब हुए 5 साल के बच्चे को जानवर उठा ले गया था। मृतक बच्चे के अवशेषों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जानवर के काटने से बच्चे की मौत का कारण बताया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद अब फोरेंसिक रिपोर्ट आने का इंतजार है। इसमें केमिकल एनालिसिस के बाद साफ स्पष्ट हो जाएगा कि बच्चे को किस जानवर ने अपना शिकार बनाया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि तीन महीने पहले कनलोग में तेंदुए ने बच्ची को जिस तरह नोचकर खाया था उसी तरह की स्थिति इस शव की भी थी। विशेषज्ञों की थ्योरी बता रही है कि जंगली जानवर बच्चे को मुंह में उठाकर ले गया और सुरक्षित स्थान पर जाकर उसे नोचकर खाया। डीएसपी हेडक्वार्टर कमल किशोर वर्मा ने बताया कि एफएसएल रिपोर्ट में हड्डियों के नमूनों और डीएनए जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी जानवर कौन सा था।

गौरतलब है कि शिमला शहर में तेंदुए के आतंक के चलते लोग दहशत हैं। शहर में कई लोग रात की ड्यूटी कर पैदल अपने घरों की ओर लौटते हैं। ऐसे में तेंदुए के हमलों की आशंका रहती है। तेंदुआ पहले भी कई लोगों पर हमला कर चुका है। लेकिन पांच अगस्त को कनलोग से एक बच्ची और डाउनडेल से चार नवंबर को एक बच्चे को  तेंदुए ने उठाकर मार डाला था। इसके बाद तेंदुए की तलाश भी की जा रही है ताकि उसे पकड़ा या मारा जा सके।

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