जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री का अहंकार सातवें आसमान पर रहा। ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बजट तैयार करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की मेहनत को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। उन्होंने सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश की। इस बजट में विकास के नाम पर जो भी दावा किया गया है, वह केंद्र सरकार की योजनाओं के जरिए ही हो पाएगा।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की चरमराती वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री के मनमाने और अविवेकपूर्ण फैसलों के कारण आज प्रदेश का कर्मचारी वर्ग हताश और निराश हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले सारा सरकारी खजाना अपने 'मित्रों' की खातिरदारी में लुटा दिया। अब खजाना खाली होने पर वित्तीय स्थिति सुधारने के ढोंग के नाम पर तानाशाही निर्णय लिए जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर छोटे कर्मचारियों तक की वेतन विलंबित की जा रही है। ठाकुर ने दावा किया कि इस बजट से न केवल विपक्ष और जनता, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायक भी खुश नहीं दिखे। सदन के भीतर कांग्रेस के नेता खुद इस बजट का उपहास उड़ा रहे थे।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर केंद्र की योजनाओं का पैसा मोड़कर नया नाम देने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने जनता के साथ बड़ा धोखा बताया। आम जनता पर अनावश्यक कर थोप दिए गए हैं। चुनाव पूर्व किए गए 300 इकाई मुफ्त बिजली और महिलाओं को 1500 रुपये देने के वादों पर कड़े नियम व शर्तें थोपी गई हैं, जिससे कम लोगों को लाभ मिलेगा, जबकि वादा सभी 18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं के लिए था। बिजली और पानी के भारी बिलों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, वहीं दूध के दाम बढ़ाने के दावों के बावजूद सरकारी खरीद कम होने से पशुपालकों में रोष है। ठाकुर ने बजट को चालाकी भरा और खोखला बताया, जिसमें केंद्रीय योजनाओं के नाम बदलकर वाहवाही लूटने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि धरातल पर कोई वास्तविक प्रावधान नहीं है, जिससे प्रदेश का कोई भी वर्ग संतुष्ट या उत्साहित नहीं है और मुख्यमंत्री को अपनी विफलताएं छिपाने के लिए सदन में मजाक का सहारा लेना पड़ रहा है।