ग्रामीण अर्थव्यवस्था परिवर्तन की इस पहल का केंद्र दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में ऐतिहासिक वृद्धि है। सरकार ने गाय के दूध की खरीद मूल्य को 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का मूल्य 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया है। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली देसी नस्ल की गाय को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने ए-2 दूध के लिए 100 रुपये प्रति लीटर का विशेष मूल्य निर्धारित किया है। किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए प्रोत्साहन राशि को 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके की यह राशि सीधे किसानों के खाते में पहुंच सके।
किसानों को बाजार की अस्थिरता से बचाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी वृद्धि की गई है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो, मक्की का समर्थन मूल्य 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो और कच्ची हल्दी का समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलो किया गया है। इसके अतिरिक्त पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। किसानों की आवाज को नीति-निर्माण में शामिल करने के लिए राज्य किसान आयोग के गठन की भी घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री ने वित्तीय चुनौतियों के बीच अनुकरणीय पहल करते हुए अपनी 50 प्रतिशत वेतन राशि अगले छह महीनों तक स्थगित करने का निर्णय लिया है। मंत्रियों और विधायकों ने भी क्रमशः 30 प्रतिशत और 20 प्रतिशत वेतन स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही सामाजिक कल्याण के तहत मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना के माध्यम से राज्य के एक लाख जरूरतमंद परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और स्थायी आवास प्रदान किया जाएगा।