हिमाचल के मंडी में कमांद से एक किलोमीटर दूरी पर दरक रही पहाड़ी से भूस्खलन का खतरा बढ़ता जा रहा है। पहाड़ी से रुक-रुककर लैंड स्लाइडिंग हो रही है। इससे ऊहल नदी का बहाव पूरी तरह से बंद होने का खतरा बना हुआ है।
कमांद के लोग दहशत में हैं। प्रशासन की ओर नदी से सटे दो दर्जन परिवारों को सुरक्षित स्थान पर ठहरने की व्यवस्था की गई है लेकिन अभी तक किसी भी परिवार ने घर नहीं छोड़ा है। जिला प्रशासन की तरफ से लोगों को अलर्ट करते हुए ऊहल नदी के किनारे न जाने की हिदायत दी है।
तेज बारिश पर पहाड़ी नीचे खिसकने से ऊहल नदी का बहाव पूरी तरह से बंद हो सकता है। करीब पांच सौ मीटर तक बनी झील से वीरवार को पानी ने अपना रास्ता बना लिया है। करीब 15 मीटर एरिया से नदी का पानी बह रहा है। लेकिन किसी भी समय पहाड़ी से भारी भूस्खलन हो सकता है।
कौल सिंह ने किया मौके का जायजा
इससे जान माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। प्रशासन के अधिकारी भी अब तक पहाड़ी पर आई दरारों तक नहीं पहुंच पाए हैं। लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक पहाड़ी के ऊपर पर बड़े क्षेत्र में मोटी-मोटी दरारें आ चुकी हैं। इससे ये पहाड़ी किसी भी समय नीचे आ सकती है।
वहीं, पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन से चिन्तित स्वास्थ्य एवं राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने वीरवार को मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने जांच के लिए टास्क फोर्स बनाने के आदेश दिए।
फोर्स में ज्योलॉजिस्ट, भू संरक्षण, राजस्व, खनन, पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड, हाइड्रोलॉजिस्ट विशेषज्ञ होंगे। यह फोर्स भूस्खलन को लेकर सर्वे करेगी और इसे रोकने के लिए उपाय बताएगी।
सुरंग निर्माण से भी बढ़ा खतरा
स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि जिस पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है, वहां दो-तीन साल पहले सुरंग निर्माण हो रहा था। यह निर्माण अभी बंद है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी पर मोटी दरारें पड़ी हुई हैं, जिसका कारण हैवी ब्लास्टिंग भी हो सकता है।
तहसीलदार अजय पराशर का कहना है कि लोगों के लिए सुरक्षित स्थान पर ठहरने की व्यवस्था की गई है। फिलहाल अभी तक किसी भी परिवार ने घर नहीं छोड़ा है। भूस्खलन वाले क्षेत्र में पूरी नजर रखी जा रही है।
वहीं, डीसी मंडी संदीप कदम के अनुसार रुक-रुककर भूस्खलन से पानी इक्ट्ठा हो रहा है। किसी भी समय तेज बहाव से रुका हुआ पानी नदी के जल स्तर को बढ़ा सकता है। लोग एहतियात बरतें।