अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि इस तरह का मामला उनके ध्यान में नहीं है।
आईजीएमसी में उपचार के लिए स्ट्रेचर लाना जरूरी है। इमरजेंसी वार्ड में उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को डॉक्टर यह राय दे रहे हैं। डॉक्टरों के इस व्यवहार से मरीज परेशान हो रहे हैं। मरीजों के परिजन आईजीएमसी की रात्रि सेवा से परेशान है। उपचार करवाने के लिए मरीजों को तीन से चार घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।
ऐसा ही मामला सोमवार देर रात पेश आया। अस्पताल में पेट दर्द की शिकायत लेकर मरीज वार्ड में मरीज पहुंचा था। उपचार के बाद मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए डॉक्टरों ने कहा था। लेकिन यहां पहुंचने पर दरवाजे में ताला लटका था। शिमला में रहने वाले पी. दीक्षित ने बताया कि ग्यारह बजे मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। मरीज को पेट दर्द था। डॉक्टर ने उन्हें अल्ट्रासाउंड करवाने के निर्देश दिए, लेकिन जैसे ही वह वहां पहुंचे तो कमरे में ताला लटका था।
सुबह चार बजे उनके मरीज का अल्ट्रासाउंड हुआ। वार्ड में मौजूद डॉक्टर भी उन्हें सहयोग नही किया। उन्होंने बताया कि देर रात पहुंचे गंभीर मरीज को देखने के लिए सभी डॉक्टर इकट्ठा हो गए जबकि अन्य मरीजों को नर्सों के हवाले छोड़ दिया गया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि इस तरह का मामला उनके ध्यान में नहीं है।