नौणी विवि के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा के सह निदेशक डॉ. दिनेश सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में विवि के पीएचडी शोधार्थी अभिलाष प्रधान ने पूर्वोत्तर भारत में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले जंगली कीवी फल को ढूंढा है। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के नौणी स्थित हाई एल्टीट्यूड वेस्टर्न हिमालयन रीजनल सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. कुमार अंबरीष ने इसकी टैक्सोनोमिक पहचान की पुष्टि की है। विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. संजीव चौहान ने बताया कि जंगली प्रजाति मिलने से कीवी की खेती का विस्तार 2800 मीटर तक की ऊंचाई तक हो सकता है। इसका उपयोग ठंड प्रतिरोधी व्यावसायिक किस्मों को विकसित करने के लिए आनुवंशिक स्रोत के रूप में किया जा सकता है।
उच्च फाइबर युक्त है कीवी
वैज्ञानिकों के अनुसार कीवी उच्च फाइबर युक्त है। इसमें नर और मादा लताएं अलग-अलग होती हैं। जनजातीय लोग इसका सेवन पोषण के लिए करते रहे हैं और इससे उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता रहती थी। शोधकर्ता अब देश के अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रजाति का पता लगाने में जुट गए हैं।
किया जाएगा प्रयोग
शोधकर्ताओं को शीत क्षेत्रों में तैयार होने वाली कीवी की प्रजाति मिली है। इसकी अभी तक कोई व्यावसायिक खेती नहीं हुई है। कीवी फ्रूट का प्रजनन पर प्रयोग किया जाएगा, ताकि लुप्त हो रही प्रजाति को संरक्षित कर इसे खेती में उपयोग किया जा सके। -प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल, कुलपति नौणी िवश्वविद्यालय