न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने शिवम सेठ, चेतन नेगी, सुनीता सेठ, प्रकाश चंद राणा, योगराज, करनैल सिंह राणा व लेखराज की जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं की हिरासत में पूछताछ किया जाना अति आवश्यक है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक में हुए 19.50 करोड़ के लोन घोटाले के सात आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने शिवम सेठ, चेतन नेगी, सुनीता सेठ, प्रकाश चंद राणा, योगराज, करनैल सिंह राणा व लेखराज की जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं की हिरासत में पूछताछ किया जाना अति आवश्यक है। पूछताछ केवल बैंक के हित के लिए ही नहीं बल्कि उन लोगों के हित के लिए भी आवश्यक है, जिन लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई बैंक के पास जमा की थी। 10 दिसंबर 2021 को कांगड़ा बैंक ऊना में 19.50 करोड़ के घोटाले के संबंध में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने ऊना में एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर एक आईएएस अधिकारी सहित 16 आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई है।
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यह है आरोप
कांगड़ा बैंक ऊना ने नियमों को ताक पर रखकर पंजाब की मैसर्ज यू आर सिंटर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 19.50 करोड़ का लोन दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि जिस कंपनी को लोन जारी किया गया, उसने स्कूटर के नंबर वाले वाहनों से लाखों रुपये का सामान ढोने की जानकारी बैंक को दी थी। जांच में इस बात की तस्दीक भी हुई है कि कंपनी ने पंजाब में पंजीकृत दो वाहनों से करीब 60 लाख रुपये की चिमनी की प्लेट और शेड बनाने के लिए माल ढुलाई दिखाई। वह दोनों ही दोपहिया वाहन के नंबर थे। जांच में इस बात की भी जानकारी सामने आई है कि कंपनी ने पंजाब के फगवाड़ा स्थित जिस मेसर्स मां चिंतपूर्णी इंटरप्राइजेज के नाम दर्ज 24 मई 2015 के 25.15 लाख और 28.17 लाख रुपये के बिल जमा किए, उस फर्म का पंजीकरण ही 25 फरवरी 2016 को निरस्त हो गया था। जिस मदन फाउंड्री वर्क्स को 25 लाख रुपये दिलवाए गए, उसके मालिक ओम प्रकाश ने बताया कि बिक्रम सेठ के कहने पर उन्होंने इस पैसे को मेसर्स बीएल सेठ एग्रो मिल्स लिमिटेड के खाते में वापस कर दिया था। साथ ही 18.23 लाख का एक बिल भी मेसर्स यूआर सिंटर प्राइवेट के नाम पर जारी किया, लेकिन माल की कोई सप्लाई नहीं की।
उद्योग लगाने का नहीं किया कोई काम
निचले स्तर के अफसरों ने बैंक प्रबंधन को यह भी बताया कि लोन की 1.88 करोड़ की पहली किस्त जारी की गई है। लेकिन इस किस्त से फर्म ने उद्योग लगाने का कोई काम नहीं किया है। इसके बावजूद लोन कमेटी के सदस्यों करनैल सिंह राणा, लेख राज कंवर, प्रकाश चंद राणा और योगराज व बैंक की तत्कालीन एमडी राखिल काहलो ने दूसरी किस्त जारी कर दी थी।