स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह की कथित सीडी के सामने आने के बाद कई और सीडी बम फूटने का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य मंत्री की यह कथित सीडी भी इसी जखीरे का एक अंश मात्र मानी जा रही है। इस जखीरे में चिंगारी लगी तो बमों के सीरियल धमाके होंगे जिसकी जद में कांग्रेस व भाजपा समेत कई राजनीतिक दल आ सकते हैं। कई राजनेताओं के चेहरे से शराफत के नकाब उतरेंगे।
कौल प्रकरण पर सियासी सन्नाटे के पीछे यही कारण है। शक के कटघरे में प्रदेश की स्मार्ट खुफिया एजेंसियां आ खड़ी हुई हैं। भाजपा सरकार में टैपिंग की जांच कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालते ही शुरू कर दी। जांच में बताया गया कि केवल चार टैपिंग के मामले अवैध पाए गए। इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर रिकार्ड न्यायालय में सौंपने का दावा भी विजिलेंस ने किया।
हजारों सीडी में कैद है नेताओं की शराफत
इतना ही नहीं नियमों के मुताबिक टैपिंग रिकार्ड को नष्ट करने की बात की गई तो ऐसे में सीडी के ये जिन्न किसके चिराग से निकल रहे हैं। इसके जवाब पर एजेंसियां बगले झांक रही हैं। जानकार बताते हैं कि हिमाचल में कभी भी सीडी बमों का जखीरा फट सकता है।
कौल सिंह की कथित सीडी के साथ ही उन सैंकड़ों सीडी की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं जिनमें कांग्रेस, भाजपा और सरकार के कई वरिष्ठ अफसरों की आवाजें टैप की गई हैं। इस बात का अंदेशा गहरा हो गया है कि इन सीडियों को ऑन रिकार्ड लाने से पहले इसकी डुप्लीकेट कॉपियां बना दी गई हों और मंत्री की यह कथित सीडी भी इसी का अंश मात्र हो।
इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के मुताबिक किसी भी फोन टैपिंग रिकार्ड को छह माह से अधिक नहीं रखा जा सकता है। बावजूद इसके कि अगर रिकार्ड को न्यायालय के समक्ष सबूत के तौर पर पेश किया जाना हो। इसके साथ ही रिकार्ड की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी जांच एजेंसी की ही रहती है। ऐसे में अगर स्वास्थ्य मंत्री की फोन पर हुई तथाकथित बातचीत का रिकार्ड लीक हो जाता है तो शक की सुई जांच टीम पर ही जाती है। इसमें विजिलेंस के आला जांच अधिकारियों से लेकर तकनीकी सैल के अफसर भी आते हैं।
अवैध तौर पर 1300 फोन टैप करने का था दावा
फोन टैपिंग मामले की बात करें तो शुरूआत में जब्त की गई चार हार्ड डिस्क की जांच में करीब 1300 फोन अवैध रूप से टैप होने की बात कही थी लेकिन जांच पूरी होते होते विजिलेंस इनमें से सिर्फ 4 फोन ही अवैध रूप से टैप होने के आरोपों को तथ्य तलाश कर पाई थी। ऐसे में बाकी बातचीत के रिकार्ड को नष्ट करना जरूरी था।
हालांकि जांच के दौरान सचिवालय में सीडी के रिकार्ड को नष्ट करने की बात भी सामने आई थी। लेकिन इस सीडी की लीक होने के बाद सवाल यह उठता है कि इसे लीक करने में किसका हाथ है? आखिरकार गलती कहां पर हुई? ऐसे में उन नेताओं और अफसरों को भी अपने व्यक्तिगत बातें लीक होने का डर सता रहा है जिनके फोन बीजेपी कार्यकाल में टैप हुए थे। अब विजिलेंस को इसकी जांच करना जरूरी हो जाता है कि रिकार्ड कहां से सार्वजनिक हुआ है।
आज और धमाका कर सकते हैं कौल
कौल सिंह बुधवार को सीडी मामले से जुड़े कई और खुलासे कर सकते हैं। उन्होंने मंडी में मीडिया से मिलने की बात कही है। मंगलवार को वे दिनभर व्यस्त रहे। फोन स्विच आफ रहा। शाम सात बजे उन्होंने अमर उजाला से कहा कि - मीडिया से फिर मिलकर जल्द ही आगे की बातें होंगी। मैंने शिमला में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान जो स्पष्ट करना था, उतना कर दिया है।
कुल्लू के बाद मंडी पहुंचे कौल
स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह सोमवार को आनी में किसी कार्यक्रम में गए थे। लौटते वक्त वह बंजार में रुके और वहां अस्पताल का निरीक्षण किया। दोपहर बाद वह सैंज पहुंचे और यहां लोगों की समस्याएं सुनीं। शाम के वक्त वह अपने विधानसभा क्षेत्र मंडी पहुंच गए। बुधवार को वह मंडी में मीडिया से बातचीत करेंगे।
लीक नहीं हुई सीडी: डीजीपी
राज्य पुलिस महानिदेशक संजय कुमार ने साफ किया है कि सीडी मामले में पुलिस अलग से कोई जांच नहीं करेगी। ऐसा करने की जरूरत नहीं है। इस पर पहले ही छानबीन हो चुकी है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है। अब केवल सोशल मीडिया के एंगल से ही जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोमवार को दो टूक कहा था कि इस प्रकरण पर जांच की जरूरत नहीं।
डीजीपी संजय कुमार ने मंगलवार को कहा कि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने पुलिस से अनुरोध किया है कि इस सीडी का प्रसार रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल यह पता करने में जुटी है कि यह सीडी फेसबुक, व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया के माध्यमों से कहां-कहां और कौन पोस्ट कर रहा है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, अभी यह मालूम करना होगा कि इसे पोस्ट भी किया जा रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि सीडी भेजने वाले के बारे में प्रदेश पुलिस का गुप्तचर विभाग अपने स्तर पर छानबीन कर रहा है। डीजीपी ने कहा कि प्रारंभिक सूचना है कि यह सीडी तीन-चार साल पहले से ही पब्लिक डोमेन में आ गई थी। यह पहले भी कुछ लोगों के पास थी। इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह हाल ही में सरकारी तंत्र से लीक नहीं हुई।
सीडी में बाली पर भी कमेंट, कौल से किया किनारा
ऑडियो सीडी प्रकरण पर अब तक कुछ भी कहने से बचते रहे खाद्य आपूर्ति एवं परिवहन मंत्री जीएस बाली ने मंगलवार को अमर उजाला से कहा कि उन्होंने अभी सीडी सुनी नहीं है। इतना कहूंगा कि किसी भी व्यक्ति की प्राइवेसी को मेंटेन किया जाना चाहिए। इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं कहना। बाली खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रियों की बैठक के लिए नई दिल्ली में हैं।
बताया जा रहा है कि सीडी में रिकॉर्ड आवाज में बाली पर भी कुछ कमेंट हैं, जिनसे वे नाराज हैं। यही वजह है कि बाली खुलकर कौल सिंह के समर्थन में खडे़ नहीं हो रहे। यह भी मालूम रहे कि कौल सिंह से पहले बाली भी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आमने-सामने हो चुके हैं। अभी वीरभद्र सिंह और बाली की तनातनी थमी ही थी कि अब वीरभद्र सिंह और कौल सिंह ठाकुर में एक-दूसरे के खिलाफ प्रत्यक्ष-परोक्ष वाक युद्व शुरू हो गया है।