यह खुलासा तब हुआ जब अमर उजाला की टीम ने स्कूल का दौरा किया।
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षा का सच जानना है तो कसुम्पटी चले आइये। प्राथमिक स्कूल कसुम्पटी के एक कमरे में तीन कक्षाएं चल रही हैं। यही नहीं, मुख्याध्यापक के कमरे में भी बच्चों की क्लास लग रही है। यह खुलासा तब हुआ जब अमर उजाला की टीम ने स्कूल का दौरा किया। ऐसे हालात में पढ़ाई होगी तो कैसे सरकारी स्कूलों के बच्चे निजी स्कूलों की बराबरी करेंगे, यह बड़ा सवाल है।
प्राथमिक स्कूल कसुम्पटी की हालत खस्ता है। स्कूल में करीब 95 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उनके लिए सिर्फ तीन कमरे हैं। यही नहीं, जहां एक तरफ मिड-डे मील बनाया जा रहा था। दूसरी तरफ उसी कमरे में बच्चों को भी पढ़ाया जा रहा था। एसएमसी ने बताया कि बरसात में तो हालत और भी खराब हो जाती है।
कमरों की दीवारों से पानी रिसता रहता है। इसके अलावा भवन के पीछे सीवरेज की लाइनों के कारण कमरों में रिसाव होता रहता है, जिससे बच्चों में बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। स्कूल प्रबंधन समिति ने दावा किया कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला कसुम्पटी 1938 से चल रहा है। कुछ वर्ष पूर्व तक पाठशाला का अपना भवन था।
कई सालों बाद वहां पर माध्यमिक पाठशाला और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छोटा शिमला के नाम से दो नए भवनों का निर्माण किया गया। 2009 में 1938 के बने प्राथमिक पाठशाला का भवन तुड़वा दिया गया, ताकि उस स्थान पर नऐ सिरे से वरिष्ठ माध्यमिक
पाठशाला का निर्माण किया जा सके और उन दो पुराने भवन में से एक को प्राथमिक पाठशाला के लिए दिया जाए। 2016 में वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का भवन बनकर तैयार हुआ और 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने नए भवन का उद्घाटन भी कर दिया है, बावजूद अभी तक पुराना भवन प्राथमिक पाठशाला को नहीं सौंपा जा रहा है।
प्रिंसिपल बोलीं, तीन कमरे मुहैया करवाए
स्कूल भवन के पीछे सीवरेज की लाइनों के कारण कमरों में रिसाव होता रहता है, जिससे बच्चों में बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है।
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उच्च शिक्षा निदेशक के निर्देशों के अनुसार छोटा शिमला सेकेंडरी स्कूल प्रबंधन ने तीन कमरे प्राइमरी स्कूल कसुम्पटी को मुहैया करवाए। इसके अलावा प्रारंभिक शिक्षा के पूर्व निदेशक ने उच्च शिक्षा निदेशक को लिखकर दिया था कि जब प्राइमरी स्कूल को किराये पर भवन या जमीन मिल जाएगी तो स्कूल को यहां से शिफ्ट कर कहीं दूसरी जगह पर स्थापित किया जाएगा। -राजेश्वरी बता, प्रिंसिपल छोटा शिमला
स्कूल में बच्चों को बैठने और खाना खाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। कार्यालय में भी बच्चों की क्लासें लगाई जा रही हैं। यहां करीब सात से आठ कमरे होने चाहिए। जबकि वहां पर सिर्फ तीन कमरों में ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। -नीलम धीमान, अध्यक्ष एसएमसी कसुम्पटी
दूसरी कक्षा के बच्चों को जहां पर पढ़ाया जाता है, वहीं पर मिड डे मील भी पकाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कभी भी हादसा हो सकता है। इसके अलावा बारिश के समय कमरे की दीवारों से पानी रिसता रहता है और सीवरेज का पानी भी दीवारों से रिस रहा है, जिससे बीमारी का खतरा बना रहता है। -मदन वर्मा, मुख्याध्यापक प्राथमिक पाठशाला कसुम्पटी
खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी से इस मामले में पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे। -राकेश वशिष्ठ, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा जिला शिमला