कारगिल युद्ध में बेटे की शहादत से परिवार टूट सा गया था। लेकिन बेटे की देश के लिए कुर्बानी और उसकी शहादत पर सरकार व समाज से मिले सम्मान ने उन्हें संबल दिया। पांच बहनों के इकलौते भाई खेम चंद की शहादत के बाद मां लता ने भाई के बेटे को गोद लिया। खेम चंद के पिता सेना में थे जो अब रिटायर हो चुके हैं। सेना से जुड़े रहने का जज्बा ही था कि गोद लिए बेटे को भी इस परिवार ने फौज में भर्ती कराया है।
शहीद खेमचंद के पूर्व सैनिक पिता मुंशी राम और माता लता ने बताया कि पांच बहनों का इकलौता भाई खो देने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। लेकिन देश पर कुर्बानी को लेकर उन्हें समाज और सरकार का सहारा मिला। एक बेटी को नौकरी मिली। शहीद बेटे के नाम से इलाके की सड़क बनाई गई। बेटा खेमचंद 19 साल की उम्र में भर्ती हुआ था और कारगिल युद्ध में 21 की उम्र में शहीद हो गया।
मां लता ने भाई के नवजात बेटे को गोद ले लिया। हाल ही में वह सेना में भर्ती हुआ है जिसकी ट्रेनिंग चल रही है। मुंशी राम और लता कहती हैं उन्हें बेटे की शहादत का दुख जरूर है लेकिन मलाल नहीं। उसने देश के लिए कुर्बानी दी है। यह परिवार फौज के अंग संग रहा है। आज उनका गोद लिया बेटा भी सेना में है जो उनके लिए फख्र की बात है।