कारगिल युद्ध में टाइगर हिल्स पर तिरंगा फहराने वाले कैप्टन लीलाराम (सेवानिवृत्त) करीब दो दर्जन युवाओं को सेना में जाने के लिए तैयार कर रहे हैं। वह इन युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं। कैप्टन लीलाराम का कहना है कि सेना में भर्ती होना ही देश सेवा का सबसे सरल व सशक्त माध्यम है। कारगिल विजय दिवस की भले ही हम 21वीं वर्षगांठ मना रहे हैं लेकिन कारगिल युद्ध की यादें आज भी रौंगटे खड़े कर देती हैं।
उनकी बटालियन 18- ग्रेनेडियर ने एक साथ अपने 36 जांबाज सैनिकों को खोया था। इनमें छह सैनिक हिमाचल से थे। 4 जुलाई 1999 को उन्होंने टाइगर हिल्स को फतह करके वहां तिरंगा फहराया था। उस समय वह हवलदार के पद पर थे। उन्हें अपने जांबाज साथियों की मौत का गम आज भी झकझोर देता है। आंखें नम हो जाती हैं।
सेना में सेवाएं देने के बाद वर्ष 2007 में वह कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त होकर अपने घर ददाहू लौट आए थे। तभी से ही वह क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए ट्रेनिंग दे रहे हैं। उनके द्वारा प्रशिक्षित 17 युवा सेना में भर्ती भी हो चुके हैं।
बिलासपुर में शहीदों के नाम की घोषणाएं पूरी होने की उम्मीद
कारगिल युद्ध में शहादत का जाम पीने वाले जिला बिलासपुर के शहीदों के परिजन आज भी राजनेताओं द्वारा की गई घोषणाओं को पूरा हेने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। शहीद मंगल सिंह के पिता प्रेम सिंह ने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने उनके घर आकर विश्वास दिलाया था कि शहीद मंगल सिंह का एक चबूतरा बनाया जाएगा, जो आज तक नहीं बना है। झंडूता के शहीद हवलदार प्यार सिंह की पत्नी सुरेश कुमारी ने बताया कि बेटे को सरकारी नौकरी दी गई है। घर तक जो सड़क निकाली गई है, उसका नामकरण उनके पति के नाम पर नहीं हुआ है।