ऑडिट में यह बात भी सामने आई थी कि बैंक प्रबंधन ने नियमों को धता बताते हुए करोड़ों के लोन बांट दिए, जिसके चलते बैंक का नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) भी ऑडिट में 25 फीसदी से ज्यादा निकला। ऑडिट रिपोर्ट राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और पंजीयक सहकारी सभाओं (आरसीएस) को भेजी गई थी। इसके बाद नाबार्ड ने हाल ही में प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर विशेष ऑडिट कराने की मांग की थी। नाबार्ड की सिफारिश के बाद ही जयराम सरकार ने विशेष ऑडिट के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं।
विजिलेंस भी कर रही है करोड़ों के लोन वितरण की जांच
विजिलेंस भी बैंक के इसी करोड़ों के लोन वितरण के खेल की जांच कर रही है, क्योंकि ऑडिट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह सामने आई थी कि बैंक के ऋण मानदंडों (एक्सपोजर नार्म) का उल्लंघन करते हुए बैंक ने अपने करोड़ों रुपये का लोन बांट दिया। यह तब हुआ जब एक्सपोजर नार्म के अनुसार केसीसी बैंक हर व्यक्ति को सिर्फ चालीस लाख रुपये तक का ही लोन दे सकता था, लेकिन बैंक ने लोन लेने वालों को आठ से दस करोड़ रुपये तक का लोन दे डाला।