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कैथलीघाट-ढली फोरलेन: वन्य जीव संरक्षण के लिए हिमाचल में पहली बार बनेंगे पशु मार्ग, मंत्रालय ने दी मंजूरी

Sat, 16 Sep 2023 09:59 PM IST
Krishan Singh दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से फोरलेन के शकराला से ढली पैकेज-दो के निर्माण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इससे 19.17 हेक्टेयर की भूमि पर 17 डंपिंग साइट, पांच संपर्क मार्ग और भट्ठाकुफर- लंबीधार-चलौंठी के लिए प्रस्तावित 3.5 किलोमीटर टनल का रास्ता भी साफ हो गया है। 
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कालका-शिमला फोरलेन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कालका-शिमला फोरलेन के तीसरे चरण में कैथलीघाट-ढली (शिमला) तक होने वाले निर्माण कार्य का रास्ता साफ हो गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से फोरलेन के शकराला से ढली पैकेज-दो के निर्माण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इससे 19.17 हेक्टेयर की भूमि पर 17 डंपिंग साइट, पांच संपर्क मार्ग और भट्ठाकुफर- लंबीधार-चलौंठी के लिए प्रस्तावित 3.5 किलोमीटर टनल का रास्ता भी साफ हो गया है। अब एनएचएआई फोरेस्ट क्लीयरेंस के एवज में पर्यावरण विभाग को 21. 88 करोड़ की राशि जमा करवा रहा है। इसमें फोरलेन में वन्य जीव संरक्षण के लिए पशु मार्ग बनेंगे। ऐसा इसलिए है कि फोरलेन जंगल से होकर जाएगा। जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए इस तरह के कॉरिडोर बनाए जाएंगे। हिमाचल में इस तरह का प्रयोग पहली बार किया जा रहा है। इसके अलावा निर्माण के लिए करीब 1,600 पेड़ काटे जाएंगे। इससे दोगुना पौधे आसपास के क्षेत्रों में लगाए जाएंगे।

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पर्यावरण मंत्रालय ने एनएचएआई को फोरलेन निर्माण के लिए एफसीए प्रोपोजल रिपोर्ट में कई अवलोकन के निवारण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एनएचएआई और वन विभाग ने मिलकर एफसीए प्रपोजलकी रिपोर्ट को दुरूस्त किया। एनएचएएआई ने दोबारा राज्य सरकार के माध्यम से रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी थी, जिसे मंजूरी मिल गई है। उधर, परियोजना अधिकारी आनंद दहिया ने बताया कि कैथलीघाट-ढली फोरलेन के दूसरे पैकेज में स्टेज वन में फोरेस्ट क्लीयरेंस मंत्रालय से मिल गई है। कैथलीघाट-ढली फोरलेन का कार्य दो चरणों में हो रहा है। भूमि के मालिकों को मुआवजा दिया जा चुका है। बीते साल जुलाई में फोरलेन के दोनों चरणों के कार्य का टेंडर कंपनियों को अवार्ड कर दिया था। प्रोजेक्ट का पहला चरण कालका-पिंजौर, दूसरा चरण पिंजौर से कैथलीघाट है। अब तीसरे चरण में कैथलीघाट से ढली (मशोबरा जंक्शन) तक निर्माण युद्धस्तर पर शुरू होगा। 2026 तक इसका काम पूरा करने का लक्ष्य है।

3914.77 करोड़ की लागत से बनेगा 28.45 किमी फोरलेन
कैथलीघाट से ढली-मशोबरा जंक्शन तक के दो पैकेज में 30.96 हेक्टेयर भूमि पर फोरलेन निर्माण होगा। पहले पैकेज कैथलीघाट से शकराला गांव तक फोरलेन की लंबाई 17.465 किमी है। इसमें लगभग 1844.77 करोड़ रुपये की लागत से 20 पुल, दो टनल, 1 अंडरपास, 53 कलवर्ट, 1 प्रमुख जंक्शन, 2 अल्प जंक्शन, 1 टोल प्लाजा बनाने का कार्य चला है। दूसरे पैकेज में शकराला गांव से ढली-मशोबरा जंक्शन तक के 10.985 किमी लंबे फोरलेन पर 2.070 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें 7 पुल, 3 टनल, 29 कलवर्ट, 3 प्रमुख जंक्शन और एक अल्प जंक्शन बनेगा। 10.6 किमी में पुलों, टनलों और फ्लाई ओवर का निर्माण होगा।
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पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन के लिए जमीन का और अधिग्रहण

उधर, पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन के लिए प्रशासन ने 4.617 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण किया है। इसकी सूचना प्रशासन की ओर से जारी कर दी गई है। जल्द ही इसका पूरा ब्योरा एनएचएआई मुख्यालय शिमला भेजा जाएगा। वहां से अनुमति मिलने के बाद भूमि मालिकों को मुआवजा राशि देने के बाद जमीन विभाग के नाम कर दी जाएगी। पिंजौर से नालागढ़ तक फोरलेन का काम चल रहा है। बरसात के चलते यह काम काफी धीमी गति से चला है। बद्दी और नालागढ़ की कनेक्टिविटी भी एक-एक पुल पर निर्भर है।

ऐसे में फोरलेन का कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है। बद्दी से नालागढ़ तक 18 किमी फोरलेन का निर्माण होगा। कई जगह सड़क निजी जमीन से जा रही है। विभाग ने जमीन अधिग्रहण करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद इसका अवार्ड करेगा और एनएचएआई मुख्यालय शिमला को इसकी जानकारी दी जाएगी। वहां से मंजूार मिलने के बाद जमीन विभाग के नाम कर दी जाएगी। अभी जो अतिरिक्त जमीन अधिग्रहण की है। इस जमीन पर कुछ पेड़ भी खड़े हैं। इन पेड़ों को भी कटाई का काम होगा।

फोरलेन निर्माण कार्य के ओएसडी सुभाष सकलानी ने बताया कि प्रशासन ने 4.617 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहण करने की अधिसूचना जारी की है। हिम आर्किटेक्ट एडं एसोसिएट एजेंसी जमीन के बीच में संपत्ति और पेड़ों का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता इसकी अपने स्तर पर जांच करेंगे। पेड़ों को लेकर वन मंडलाधिकारी मूल्यांकन करेंगे। इसके बाद एनएचएआई मुख्यालय शिमला से इसके लिए फंड दिया जाएगा।
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