ज्यूरी में हाईवे छोटे वाहनों के लिए खुला।
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हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर बुशहर में ज्यूरी के पास बाधित नेशनल हाईवे-5 पर करीब 33 घंटे बाद छोटे वाहनों के लिए बहाल हो गया है। मंगलवार को दूसरे दिन भी पहाड़ी से बार-बार चट्टानें गिर रही थीं। इससे प्रशासन और एनएच प्राधिकरण को मार्ग बहाल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। एनएच पर यातायात ठप रहने से किन्नौर जिले के बागवानों और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बागवानों का करोड़ों रुपये का सेब मार्ग अवरुद्ध होने से फंस गया है। बीते सोमवार को ज्यूरी से करीब 2 किलोमीटर आगे एनएच-5 पर पहाड़ी से चट्टानें गिर गईं। एनएच बाधित होने से किन्नौर जिले का संपर्क देश-दुनिया से कट गया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और एनएच प्राधिकरण यातायात बहाल करने में जुटे रहे। मंगलवार शाम करीब छह बजे मार्ग को छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया।
एसडीएम रामपुर यादविंद्र पॉल और एनएच के अधिकारी सोमवार रात 9 बजे तक मार्ग की बहाली में जुटे रहे। मंगलवार सुबह 6 बजे से प्रशासन और एनएच के अधिकारी मौके पर पहुंचे और दिनभर मार्ग बहाली में जुटे रहे। एनएच को बहाल करने के लिए 3 पोकलेन, एक लोडर, एक जेसीबी और एक कंप्रेशर मशीन लगाई गई है। एक्सईएन एनएच केएल सुमन, एसडीओ सुनील गुप्ता, जेई चंद्र शास्त्री और प्रदीप पटियाल, प्रशासन और पुलिस बाधित मार्ग करने में जुटे हैं। उधर, एसडीएम रामपुर यादविंद्र पॉल ने कहा कि मंगलवार शाम को छह बजे के आसपास मार्ग को छोटे वाहनों के लिए बहाल कर दिया गया है। ऊपरी पहाड़ी से बार बार चट्टानें गिरने के कारण मार्ग को बहाल करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। फिर भी मार्ग को बहाल करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
वांगतू-काफनू मार्ग तीसरे दिन भी बाधित, हजारों लोगों का संपर्क कटा
उधर, किन्नौर में वांगतू-काफनू संपर्क सड़क तीसरे दिन भी वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल नहीं हो पाई है। भारी भूस्खलन होने से भावावैली की तरफ यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। मार्ग बाधित होने से क्षेत्र की पांच पंचायतों का संपर्क शेष दुनिया से कट गया है। लोक निर्माण विभाग और जेएसडब्ल्यू प्रबंधन की आधा दर्जन के करीब मशीनें और मजदूर बाधित मार्ग को बहाल करने में जुटे हैं। मगर रूक-रूककर भूस्खलन होने की वजह से तीसरे दिन भी मार्ग बहाल नहीं हो पाया है। मार्ग बाधित होने से भावावैली के कटगांव, यांगपा-1, यांगपा-2, काफनू और क्राबा पंचायत का संपर्क देश दुनिया से कट गया है। इससे करीब 5 हजार की आबादी परेशानियां झेलने को मजबूर हैं।