भाजपा में बगावत से कांग्रेस की राह आसान
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हिमाचल प्रदेश के जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में भाजपा में बगावत चरम पर पहुंच गई है। चेतन बरागटा के बगावत पर उतरने से भाजपा का सारा चुनावी गणित बिगड़ गया है। पार्टी के समर्थक बंट गए हैं। भाजपा में बगावत से कांग्रेस की बांछें खिली हुई हैं। कांग्रेस अब चेतन बरागटा के चुनावी मैदान में उतरने के बाद सीधी टक्कर उनसे ही मान रही है। भाजपा में चल रहे घमासान के बीच चेतन बरागटा के निर्दलीय पर्चा भरने से मुकाबला तिकोना हो गया है।
टिकट न मिलने से नाराज चेतन बरागटा समर्थकों ने चुनाव प्रभारी एवं शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज के खिलाफ शुक्रवार को जमकर नारेबाजी की। चेतन के साथ जुटी भीड़ देखकर विरोधी खेमे में खलबली मची हुई है। नीलम सरैईक के नामांकन दाखिल करने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी यहां पहुंचे थे। लेकिन जनसभा में बहुत कम लोग थे। पंडाल के बीच कई जगह खाली पड़ी कुर्सियां और कार्यकर्ताओं की कमी उपस्थिति नाराजगी को जाहिर कर रही थीं। यहां से भाजपा प्रत्याशी की चुनावी डगर आसान नहीं है। मंच पर बैठे भाजपा के आला नेता भी इस स्थिति को भांप कर बगले झांकते नजर आए।
नीलम सरैईक ने मंच से दिवंगत नरेंद्र बरागटा को बागवानों का मसीहा बताया और उनके विकास कार्यों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज के प्रयासों से जुब्बल कोटखाई की जनता को चुनाव से पहले मिली सौगातों का वास्ता देकर विजयी बनाने का आग्रह किया। लेकिन बरागटा समर्थक भाजपा प्रत्याशी को आड़े हाथ लेते हुए दिखे। कहते नजर आए जिसे इस बार जिला परिषद चुनाव में जनता नकार चुकी है वह भाजपा को यहां से कैसे जीत दिलाएगी।
सीएम से मिलने के बाद बागी बन भरा पर्चा
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से वीरवार शाम को मुलाकात करने के बावजूद चेतन बरागटा ने निर्दलीय पर्चा भरकर अपनी मंशा जाहिर कर दी है। चेतन का दावा है कि समर्थकों से परामर्श के बाद यह कदम उठाया। अधिकांश भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता सरेआम चेतन के साथ चल रहे हैं। उपचुनाव में भाजपा की स्थिति बिगड़ती देख अब डैमेज कंट्रोल का फैसला लिया है। हिमाचल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के आग्रह के बावजूद चुनावी ताल ठोंकने वाले चेतन बरागटा को रोकने के लिए अब केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को मैदान में उतारा जा रहा है।
समर्थकों से नाराजगी मोल नहीं ले सकते अब बरागटा
चेतन बरागटा को टिकट न मिलने से उनके समर्थक ही नहीं बल्कि कांग्रेस भी हैरत में हैं। पिता के निधन और प्रमोट करने के बावजूद टिकट न देने से लोगों के बीच बरागटा के लिए सहानुभूति देखी गई इसी का नतीजा शुक्रवार को चेतन के साथ जुटी भीड़ थी। अब चेतन भी पीछे हटकर समर्थकों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते।