सड़क के चौड़ा होने के बाद भूस्खलन का खतरा कम हो जाएगा। भूस्खलन रोकने के लिए सड़क पर जपानी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत घास की पट्टियों के साथ इंटरलिंक जैनमेश, हैशब्रश, शॉटब्रीट आदि का इस्तेमाल होगा। जानकारों का कहना है कि इस तकनीक से पहले स्लोप तैयार होगा।
हिमाचल प्रदेश में बन रही सड़कों में विदेशी तकनीक कारगर साबित हो रही है। पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा 707 नेशनल हाईवे को चौड़ा करने के लिए 1337 करोड़ मंजूर हुए हैं। लगभग 104 किमी लंबे इस सड़क मार्ग पर भूस्खलन रोकने के पहले ही प्रबंध किए जाएंगे। भूस्खलन रोकने के लिए जपानी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। हाल में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस सड़क का शिलान्यास किया है। सड़क का कार्य पांच फेस में चलेगा।
विज्ञापन
इस सड़क मार्ग पर अकसर भूस्खलन का खतरा रहता है। सड़क के चौड़ा होने के बाद भूस्खलन का खतरा कम हो जाएगा। भूस्खलन रोकने के लिए सड़क पर जपानी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत घास की पट्टियों के साथ इंटरलिंक जैनमेश, हैशब्रश, शॉटब्रीट आदि का इस्तेमाल होगा। जानकारों का कहना है कि इस तकनीक से पहले स्लोप तैयार होगा। उसके बाद नेट लगेंगे और कंकरीट का इस्तेमाल होगा। आवश्यकता के अनुसार इसमें एंकर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक में पहाड़ पर पहले ही पौधे, झाड़ियां आदि लगाने की जगह रखी जाती है। कार्य पूरा होने के बाद इसमें झाड़ियां आदि लगने से हरियाली भी बनी रहती है।
2800 पेड़ कटेंगे, 70 से अधिक घर टूटेंगे
सड़क निर्माण पांच चरणों में होगा। पांवटा और रेणुका वन मंडल के अंतर्गत लगभग 2800 पेड़ कटेंगे। शिलाई तक जगह-जगह कई मकान भी दायर में आ रहे हैं। प्रारंभिक आकलन में करीब 70 मकान टूटेंगे। हालांकि, निशानदेही का कार्य अभी जारी है। पांवटा शहर में यह सड़क फोरलेन होगी। इससे आगे सड़क को डबललेन किया जाएगा।
विज्ञापन
केबल, सीवरेज के लिए रखी जाएगी जगह
सड़क निर्माण के दौरान आबादी वाले इलाकों में केबल और सीवरेज लाइन के लिए पहले ही व्यवस्था की जाएगी। एनएचएआई के अधिशासी अभियंता विवेक ने बताया कि भूस्खलन रोकने के लिए जपानी तकनीक का इस्तेमाल होगा। केबल लाइन और सीवरेज के लिए आबादी वाले इलाकों में पहले ही जगह रखी जाएगी।