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HP Politics: जयराम ठाकुर बोले- पेपर लीक के मामलों की सच्चाई छिपा रही प्रदेश कांग्रेस सरकार

Tue, 28 Jul 2026 06:06 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ, जबकि प्रदेश की जनता पूछ रही है कि सरकार ने भर्ती परीक्षाएं करवाई ही कितनी हैं। 
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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं के मामलों में सच्चाई छिपाने का प्रयास कर रही है। जो सरकार पेपर लीक के दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है, उसे युवाओं के भविष्य पर राजनीति करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ, जबकि प्रदेश की जनता पूछ रही है कि सरकार ने भर्ती परीक्षाएं करवाई ही कितनी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्री-नर्सरी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने के बाद भर्ती को बीच में रोकना पड़ा, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और कई शिक्षकों को निजी स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारियों और नर्सों की भर्ती के लिए आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।

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सरकार से जुड़े लोगों ने भर्ती प्रक्रियाओं को प्रभावित किया: जयराम
जयराम ने आरोप लगाया कि सरकार से जुड़े लोगों ने भर्ती प्रक्रियाओं को प्रभावित किया और इस मामले में उच्च न्यायालय ने भी कड़ी टिप्पणियां की थीं। पूर्व मुख्यमंत्री ने हाल ही में हुई पुलिस भर्ती परीक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने बड़े स्तर पर मास चीटिंग के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई में पेपर बेचने और खरीदने के आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, नकदी और लेन-देन के सबूत भी मिले, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने मामले की जांच को आगे नहीं बढ़ाया। जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस भर्ती पेपर लीक का मामला सामने आने पर तत्काल एफआईआर दर्ज की गई, एसआईटी गठित की गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई और मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी।
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श्वेत पत्र की मांग पर पलटवार
उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई की जांच रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के बावजूद वर्तमान सरकार ने दो वर्षों तक रिपोर्ट पर कोई निर्णय नहीं लिया। नेता विपक्ष ने मुख्यमंत्री द्वारा भर्ती घोटालों और पेपर लीक मामलों पर श्वेत पत्र लाने की घोषणा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता चाहती है तो पहले अपने कार्यकाल में हुई भर्ती प्रक्रियाओं, आउटसोर्स नियुक्तियों और लंबित जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक करे। प्रदेश के युवा रोजगार और निष्पक्ष भर्ती चाहते हैं, इसलिए सरकार को आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
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