पुलिस मुख्यालय की ओर से हाल ही में किसी भी केस में नामित न होने का हवाला देते हुए कुछ समय पहले एपी सिंह को पदोन्नत किए जाने के संबंध में चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी के आधार पर गृह विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया, जिसमें गुड़िया केस में फंसे निलंबित आईजी जहूर जैदी को छोड़कर अन्य के लिए पदोन्नति की सिफारिश की गई।
वीरभद्र सरकार के करीबी रहे आईजी एपी सिंह को जयराम सरकार एडीजी बनाने के मूड में नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय की सिफारिश के आधार पर जो प्रस्ताव सरकार के पास विचारार्थ भेजा था, उसपर बिना फैसला लिए ही सरकार ने गृह विभाग को लौटा दिया है। यह तब है जब एडीजी अशोक तिवारी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के चलते प्रदेश में एडीजी रैंक के सिर्फ दो अफसर एसपी सिंह और एन वेणुगोपाल ही रह गए हैं।
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इन दोनों अधिकारियों पर पहले से ही दो-दो महकमों का चार्ज हैं। वहीं, पुलिस मुख्यालय में एडीजी कानून व्यवस्था और एडीजी एपीएंडटी का पद रिक्त हो गया है, लेकिन सरकार एपी सिंह को किन्हीं कारणों से पदोन्नत करने से कतरा रही है। दरअसल, पुलिस मुख्यालय की ओर से हाल ही में किसी भी केस में नामित न होने का हवाला देते हुए कुछ समय पहले एपी सिंह को पदोन्नत किए जाने के संबंध में चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी के आधार पर गृह विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया, जिसमें गुड़िया केस में फंसे निलंबित आईजी जहूर जैदी को छोड़कर अन्य के लिए पदोन्नति की सिफारिश की गई।
खास बात यह है कि एपी सिंह एडीजी बनने के लिए जरूरी कार्यकाल की मियाद को पूरी कर चुके हैं। साथ ही उनके पक्ष में विजिलेंस क्लीयरेंस और पुलिस मुख्यालय की ओर से क्लीन चिट के बाद भी सरकार प्रमोशन पर फैसला लेने से कतरा रही है। सूत्रों के अनुसार गृह विभाग के पदोन्नति प्रस्ताव को सरकार ने फिलहाल गृह विभाग को वापस लौटा दिया है। पीएचक्यू इस बात से चिंतित है कि वर्तमान में एडीजी की कमी की वजह से अब कामकाज पर असर पड़ रहा है।
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ऐसे में वह जल्द से जल्द एक और एडीजी चाहता है, लेकिन सरकार किन्हीं कारणों आईजी से एडीजी बनाने की फाइल पर फैसला नहीं ले रही है। सूत्रों का कहना है कि चूंकि एपी सिंह पिछली सरकार में मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाते थे, इसी कारण सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ नेताओं और शासन में बैठे कुछ अधिकारियों की वजह से पदोन्नति पर विचार भी नहीं किया जा रहा है।