हिमाचल प्रदेश पुलिस से 2013 में बतौर डीएसपी रिटायर होने वाली रानी देवी को 1973 में मां की हिम्मत और परिवार की जिम्मेदारियों ने पहली महिला पुलिस कर्मी बना दिया। उस दौर में हिमाचल प्रदेश पुलिस में सिर्फ पुरुष कर्मचारियों का ही बोलबाला था। लेकिन एएसआई अकाउंटेंट के पद पर तैनात पिता दाता राम शर्मा की असमय हुई मौत के बाद महज 17.5 साल की उम्र में इंटर की पढ़ाई कर रही रानी शर्मा को फोर्स ज्वाइन करनी पड़ी।
रानी कहती हैं कि शुरुआत में ज्वाइन करने से पहले पुलिस को लेकर उनके मन में तमाम सवाल थे लेकिन हिमाचल प्रदेश पुलिस के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (वर्तमान में डीजीपी के समकक्ष) डीसी शर्मा और प्रशिक्षण देने वाले स्टाफ के सहयोग ने उन्हें और उन जैसी दो अन्य युवतियों को पुलिस की खाकी वर्दी पहनकर गर्व से अपनी ड्यूटी निभाने को प्रोत्साहित किया।
रानी ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस ज्वाइन की तो उन्हें कुल्लू एयरपोर्ट में महिला यात्रियों की सुरक्षा जांच के लिए तैनात कर दिया गया। करीब डेढ़ साल तक वहां ड्यूटी के बाद 1975 में महिला पुलिस कर्मियों का एक पूरा बैच तैयार हो गया। इस बैच के साथ ही रानी व अन्य ने 1975 में पुलिस की ट्रेनिंग ली। रानी ने बताया कि पूरे कार्यकाल के दौरान उन्हें एक बार भी पुलिस बल के भीतर परेशानी नहीं हुई। हां, कुछ रिश्तेदारों ने जरूर सिपाही बनने पर सवाल उठाए।
एक बार उनकी शादी तय होने के समय भी इसे मुद्दा बनाया गया लेकिन तब उनके होने वाले ससुर ने सपोर्ट किया और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। रानी कहती हैं कि पुलिस की नौकरी आसान नहीं है लेकिन उन्होंने पुलिस और परिवार के बीच बखूबी तालमेल रखा और ससम्मान सेवानिवृत्त हुईं। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वह भी पुलिस फोर्स ज्वाइन करने को आगे आएं और प्रदेश में अपनी सेवाएं दें।