राज देवता माधो राय की पालकी के आगे और पीछे चल रहे देव रथ। वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर नाचते गाते देवलु। अतिथियों के सिर पर सजी रंगबिरंगी पगड़ियां। ऐसा लग रहा था कि मानो देवलोक धरती पर उतर आया है। शनिवार को महाशिवरात्रि पर्व के शुुभारंभ पर निकली जलेब में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल, नगाड़े, करनाल, शहनाई की देव ध्वनि से हर कोई रोमांचित हो उठा।
शनिवार को राज देवता माधोराय के दरबार से दोपहर दो बजे के बाद जलेब शुरू हुई। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर देव रथों के साथ नाचते हुए सैकड़ों देवलु जलेब में शामिल हुए। उपायुक्त कार्यालय एवं राजदेवता माधोराय प्रांगण से लेकर पड्डल मैदान तक सड़क के दोनों तरफ उमड़ी भीड़ ने जलेब में देव आस्था का नजारा देखा। जलेब में चुनिंदा देवी-देवता शामिल होते हैं। जबकि जनपद के बड़ादेव कमरूनाग जलेब में शिरकत नहीं करते हैं।
देवलोक के नजारे के साथ वीर सपूतों के बलिदान की दिखी झलक
जलेब में देवलोक के नजारे के साथ वीर सपूतों के बलिदान की झलक और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता की अलख भी जगाई गई। सबसे पहले इंडियन आर्मी की ओर से एनसीसी विभाग ने सेना के शूरवीरों की शहादत और देशप्रेम की झलक दिखाई। उनके पीछे पूर्व सैनिक और वीरनारियां चल रहे थे।