अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के लिए सजा गेयटी थियेटर।
- फोटो : अमर उजाला
साहित्य अकादमी ने शिमला के ऐतिहासिक गौथिक सभागार से ब्रिटिश हुकूमत में भारत के प्रमुख रहे ‘वायसराय’ का नाम खुद से ही जोड़ दिया। अकादमी ने गेयटी थियेटर के गौथिक हाल का नाम वायसराय सभागार रखा है। यह नाम किस किताब में लिखा है, इसका जवाब अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव नहीं दे पाए। आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी में पहली बार शिमला में होने जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय उत्सव के बीच भी अंग्रेजी हुकूमत का मोह नहीं छोड़ पाने पर सवाल उठ रहे हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और साहित्य अकादमी के इस संयुक्त आयोजन की विश्व स्तर पर चर्चा है। यह उत्सव गेयटी थियेटर के सभी प्रमुख सभागारों में हो रहा है। अंग्रेजों के जमाने में जिस हाल में नाटक होते थे, उसे गौथिक सभागार जरूरत कहा जाता है, मगर वायसराय सभागार नाम इसे पहली दफा दिया गया है।
‘उन्मेष : अभिव्यक्ति का उत्सव’ नाम से एक पुस्तिका भी छपवाई गई है। इसमें दी कार्यसूची में ‘वायसराय सभागार’ का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम तय हुए हैं। 16 जून को गुलजार भी इसी हाल में साहित्य और सिनेमा पर परिचर्चा की अध्यक्षता करेंगे। 18 जून को बुकर अवार्ड विजेता गीतांजलि श्री भी इसी में भारतीय भाषाओं में महिला लेखन विषय पर परिचर्चा में भाग लेंगी।
वीरवार को पत्रकार वार्ता में अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि कहीं इसका उल्लेख होगा, तभी जोड़ा गया होगा। यह उल्लेख कहां है, वह इसे नहीं बता पाए। राज्य भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक पंकज ललित भी इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाए।
गौथिक सभागार में रिजर्व जगह पर नाटक देखने बैठते थे वायसराय
अंग्रेजों के शासनकाल में गौथिक सभागार में तत्कालीन वायसराय एक रिजर्व जगह पर नाटक देखने बैठते थे। यह बीच की एक बालकनी थी। किनारे वाली बालकनियों में कमांडर-इन-चीफ और पंजाब के गवर्नर बैठते थे। इससे ज्यादा कहीं कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान जिसे वायसरीगल लॉज कहते थे, वहां पर जरूर वायसराय बेंक्वेट था।