भगवान रघुनाथ को रथ में बैठाने के बाद शाम करीब 4:00 बजे लंका दहन से पहले सभी रस्मों को पूरा किया गया। जैसे ही रथ आगे बढ़ा तो सबसे पहले माता हिडिंबा ढालपुर मैदान के एक छोर की तरफ बढ़ीं। माता हिडिंबा और राजपरिवार की लंका दहन में अहम भूमिका रहती है। यहां से लौटने के बाद रथ फिर मैदान में पहुंचता है और रघुनाथ पालकी में सवार होकर अपने देवालय रघुनाथ के लिए रवाना हो जाते हैं।