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Himachal: लंका दहन के साथ देवी-देवताओं का महाकुंभ कुल्लू दशहरा संपन्न, सैकड़ों ने खींचा भगवान रघुनाथ का रथ

Sat, 19 Oct 2024 07:22 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला

सार

दशहरा के अंतिम दिन भगवान रघुनाथ ने रथ में सवार होकर लंका पर चढ़ाई की। भगवान रघुनाथ का रथ खींचने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। 
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लंका दहन के साथ देवी-देवताओं का महाकुंभ कुल्लू दशहरा संपन्न - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रघुनाथ की नगरी में अब अगले साल तक देवी-देवताओं की मधुर ध्वनि नहीं गूंजेगी। शनिवार को लंका दहन की परंपरा निभाने के बाद अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का समापन हो गया। दशहरा के अंतिम दिन भगवान रघुनाथ ने रथ में सवार होकर लंका पर चढ़ाई की। इस दौरान भगवान रघुनाथ के रथ को खींचने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी। 364 सालों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करने के बाद शाम करीब 5:00 बजे भगवान रघुनाथ पालकी में अपने देवालय सुल्तानपुर के लिए रवाना हुए।

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इससे पहले लंका दहन में माता हिडिंबा, बिजली महादेव के साथ बंजार, महाराजा कोठी, खराहल और ऊझी घाटी के करीब 50 देवी-देवताओं ने पूरे लाव-लश्कर के साथ हिस्सा लिया। इससे पहले दोपहर बाद लगभग 3:00 बजे लंका दहन के लिए देवी-देवता भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में पहुंचना शुरू हो गए। जैसे ही भगवान रघुनाथ अस्थायी शिविर से निकलकर रथ की ओर चले तो जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयकारों से माहौल देवमय हो गया।

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भगवान रघुनाथ को रथ में बैठाने के बाद शाम करीब 4:00 बजे लंका दहन से पहले सभी रस्मों को पूरा किया गया। जैसे ही रथ आगे बढ़ा तो सबसे पहले माता हिडिंबा ढालपुर मैदान के एक छोर की तरफ बढ़ीं। माता हिडिंबा और राजपरिवार की लंका दहन में अहम भूमिका रहती है। यहां से लौटने के बाद रथ फिर मैदान में पहुंचता है और रघुनाथ पालकी में सवार होकर अपने देवालय रघुनाथ के लिए रवाना हो जाते हैं।
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