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देश के प्रथम मतदाता बोले- विकास के लिए पहाड़ों को छलनी करना सही नहीं

Tue, 31 Aug 2021 05:00 AM IST
अरविन्द ठाकुर रमेश नेगी, अमर उजाला नेटवर्क, रिकांगपिओ (किन्नौर)

सार

श्याम सरण नेगी ने कहा कि बटसेरी और निगुलसरी हादसे से बहुत आहत हूं। विकास के कार्य होने चाहिए, लेकिन पहाड़ों को छलनी करके मौत का तांडव करना सही नहीं है।
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देश के पहले मतदाता 103 वर्षीय श्याम सरण नेगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश आजादी के 75वें साल का जश्न मना रहा है। इसके साथ ही देश और प्रदेश में विकास के कई नए आयाम स्थापित हुए हैं, लेकिन किन्नौर जिले ने विकास के नाम पर बहुत कुछ खोया है। ऐसा कहना है देश के पहले मतदाता 103 वर्षीय श्याम सरण नेगी का। उनकी नजर में आज के और 75 साल पहले के किन्नौर में बहुत ज्यादा अंतर आ गया है।

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किन्नौर जिला दिन-प्रतिदिन विकास की प्रगति पर है, लेकिन विकास के नाम पर पहाड़ों को छलनी करना सही नहीं है। पहले किन्नौर जिले में भूस्खलन की घटनाएं कम ही होती थीं। जबसे किन्नौर जिले में हाइड्रो परियोजनाओं का निर्माण और हैवी ब्लास्टिंग शुरू हुई है, तबसे पहाड़ खोखला होने शुरू हो गए हैं। इसे रोकने के अलावा कोई चारा नहीं है।

75 साल पहले किन्नौर जिला छह महीने के लिए देश दुनिया से कटा रहता था। उन दिनों मनोरंजन का कोई साधन न होने पर जिले के लोग एक जगह एकत्रित होकर तोशिम कार्यक्रम का आयोजन करते थे। इसमें आपसी प्रेम भाव और प्यार बना रहता था, लेकिन समय के साथ-साथ काफी बदलाव हुआ है। आज किन्नौर जिले की हर पंचायत में सड़कें, बिजली, स्वास्थ्य, पानी और टेलीफोन की सुविधा है, लेकिन इसका खामियाजा भी भुगता है।
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नेगी ने कहा कि बटसेरी और निगुलसरी हादसे से बहुत आहत हूं। विकास के कार्य होने चाहिए, लेकिन पहाड़ों को छलनी करके मौत का तांडव करना सही नहीं है। इसके लिए किन्नौर के लोगों को जागरूक होना जरूरी है। आज किन्नौर के युवा पढ़े लिखे और समझदार हैं, उन्होंने ‘नो मींस नो, सेव किन्नौर’ अभियान के तहत किन्नौर को बचाने का जो संकल्प लिया है, वह प्रशंसनीय कार्य है।

हम सभी को मिलकर इस लड़ाई में साथ देना होगा, तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए किन्नौर जिले को सुरक्षित कर सकते हैं। पहले भू-संरक्षण और प्राकृतिक आपदा कम होती था। लोग सिर्फ बर्फ के ग्लेशियर से डरते थे, लेकिन आज हर जगह भूस्खलन होना चिंता का विषय है। युवा पीढ़ी को किन्नौर के अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आना होगा, तभी किन्नौर जिले को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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