इधर, चंबा जिले की जम्मू-कश्मीर से लगती भारतीय सीमा पर सुरक्षा चौकियों, कैंट एरिया डलहौजी, एयरफोर्स स्टेशन गांधी चौक, डेनकुंड एयरफोर्स स्टेशन में हाई अलर्ट जारी किया गया है। चंबा जिले का 64 किलोमीटर का सीमांत क्षेत्र पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर के साथ लगता है।
इससे पूर्व वर्ष 1998 में आतंकवादियों ने सतरूंडी और कालावन में 35 निहत्थे मजदूरों को गोलियों से भून डाला था। पुलिस अधीक्षक चंबा डॉ. मोनिका ने बताया कि जम्मू-कश्मीर की सीमा के साथ लगते जिले के सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा चौकियों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
गगल एयरपोर्ट प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। इसके लिए गगल एयरपोर्ट के निदेशक किशोर शर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई। एयरपोर्ट के सह प्रभारी तरुण गुलाटी ने बताया कि प्रशासन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि अब एयरपोर्ट के भीतर केवल यात्रियों और पासधारक कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।
चीन से सटी हिमाचल की सरहद पर भी जवानों को अलर्ट कर दिया गया है। स्पीति घाटी का करीब 23 किमी हिस्सा चीन की अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा है। यहां पर भारतीय सेना की डोगरा, सिख और जेएंडके राइफल की तीन रेजिमेंट तैनात हैं।
जबकि ग्यू में आईटीबीपी के जवान तैनात हैं। पीओके में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले के बाद चीन से सटी सरहद पर भी सेना को अलर्ट रहने को कहा गया है। स्पीति का ग्यू गांव चीन बॉर्डर से महज आठ किलोमीटर दूर है। हालांकि मामले को लेकर कोई भी सैन्य अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
इधर, अतिरिक्त उपायुक्त स्पीति विक्रम नेगी ने कहा कि बॉर्डर में अलर्ट को लेकर सेना की तरफ से स्थानीय प्रशासन को किसी तरह की सूचना नहीं मिली है। बताया कि स्पीति में लपचा से ग्यू तक करीब 23 किमी का हिस्सा चीन बॉर्डर से लगता है।