हर घर में दिव्यांगों को चिह्नित कर अलग सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद दृष्टि बाधित मतदाताओं को जहां एनसीसी और एनएसएस जैसे संगठनों के कैडेटों की मदद से मतदान केंद्र पर सहायता मुहैया कराई जाएगी।
वहीं, अन्य तरह के मतदाताओं को उनकी जरूरत के हिसाब से संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। मुख्य चुनाव अधिकारी देवेश कुमार ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब एक लाख से ज्यादा दिव्यांग हैं।
चूंकि प्रदेश में मतदाता संख्या जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से शत प्रतिशत है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि दिव्यांग मतदाता सूची में शामिल हैं। लेकिन, उनको मतदाता सूची से चिह्नित नहीं किया जा सकता। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से उन्हें चिह्नित किया जाएगा।