भारत सरकार की ओर से प्रदेश के लिए 70 राष्ट्रीय राजमार्गों की घोषणा की गई थी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 58 सड़कों की डीपीआर तैयार करने के लिए केवल 136.22 करोड़ मंजूर किए। 70 राष्ट्रीय राजमार्गों में से केवल 2 सड़कों का निर्माण एचपीआरआईडीसी द्वारा एनएच मानक के अनुरूप किया गया है, इन सड़कों को राजमार्ग घोषित करने का मामला अभी भी लंबित है। केंद्र सरकार ने महज राजनीतिक लाभ के लिए 70 एनएच की घोषणा की।
सरकारी कार्यक्रमों में फिजूलखर्च
आजादी का अमृत महोत्सव
- 6,93,00,238
हिमाचल स्थापना के 75 वर्ष
- 28,42,63,033
जनमंच - 534.38 लाख
इसके अतिरिक्त मुफ्त बिजली स्थगन और दोषपूर्ण आबकारी नीति से भी प्रदेश को चपत लगी।
हिमाचल में प्रति व्यक्ति ऋण 2017-18 में 66232 रुपये था, 2018-19 में 69743, 2019-20 में 76575, 2020-21 में 82700, साल 2021-22 में 85931 और मौजूदा 2022-23 में 1,02,818 रुपये पहुंच गया है। (आंकड़े करोड़ों में)
केंद्र सरकार ने उधार लेने की सीमा में की कमी
15वें वित्त आयोग की सिफारिशों को मानते हुए केंद्र ने उधार लेने की सीमा 2022-23 की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3.50 फीसदी से घटाकर 2023-24 में जीएसडीपी का 3 फीसदी कर दी है। इस बदलाव के बाद उधार लेने की सीमा 1057 करोड़ रुपये कम हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा उधार सीमा में कटौती से राज्य में विकासात्मक गतिविधियों पर असर पड़ेगा।
पिछली सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर मीट पर फिजूल खर्च किया। सरकार ने न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी इन्वेस्टर्स मीट आयोजित की। पूर्व का सरकार दावा था कि 96000 करोड़ का निवेश आएगा लेकिन राज्य में निवेश केवल 7191 करोड़ रुपये ही आया।
अनुशंसित राशि नहीं की जारी
15वें वित्त आयोग ने 1420 करोड़ जिसमें मंडी में ग्रीन फील्ड हवाई अड्डे के लिए 1000 करोड़, कांगड़ा हवाई अड्डे के लिए 400 करोड़, ज्वालामुखी में जलापूर्ति, सीवरेज, नालों के चैनलाइजेशन के लिए 20 करोड़ की सिफारिश की लेकिन केंद्र ने राशि जारी नहीं की।
पिछली सरकार की कर्मचारियों और पेंशन भोगियों की 10600 करोड़ से अधिक की देनदारियां लंबित थीं। पिछली सरकार ने 1 जनवरी 2016 को वेतनमान में संंशोधन तो किया लेकिन बकाया का भुगतान नहीं किया। पूर्व सरकार ने साल 2018-19 में 6044, 2019-20 में 8591, 2020-21 में 8273, साल 2021-22 में 6080 और मौजूदा 2022-23 में 16261 करोड़ पहुंच गया है। साल 2021-22 की तुलना में 2022-23 में 267.45 फीसदी अधिक कर्ज उठाया गया।
1707.12 करोड़ के घाटे में एचआरटीसी
हिमाचल पथ परिवहन निगम एचआरटीसी का संचयी घाटा 31 मार्च 2017 को 1113.91 करोड़ से बढ़कर 31 मार्च 2022 तक 1707.12 करोड़ पहुंच गया।
उपक्रम का नाम 31.3.2017 31.3.2022
राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड 2034.85 1809.61
सड़क परिवहन निगम 1113.91 1707.12
पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड 107.33 688.32
पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड 13.91 395.91
हिमाचल प्रदेश वित्तीय निगम 161.06 180.97
पर्यटन विकास निगम लिमिटेड 23.01 122.39
राज्य वन विकास निगम 97.45 106.24