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Shimla News: पीरन पंचायत से 50 साल में नहीं बना अजा वर्ग का पुरुष प्रधान

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अनुसूचित जाति की महिलाएं दो बन चुकी हैं प्रधान, पुरुष वर्ग के लिए एक भी बार भी आरक्षित नहीं हुई पंचायत
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40 साल तक सामान्य वर्ग से ही बना है प्रधान
पंचायत में अजा वर्ग की आबादी है 57 फीसदी
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। पंचायतीराज चुनाव के मध्यनजर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आरक्षण रोस्टर का कोली समाज कसुम्पटी ने स्वागत किया है। इसके साथ ही मशोबरा ब्लॉक की पीरन पंचायत को अनुसूचित जाति के पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित करने की मांग की है।
लोगों ने कहा कि पीरन में दो बार अनुसूचित जाति की महिलाएं प्रधान बनीं लेकिन पुरुष वर्ग को आज तक मौका नहीं दिया गया। हालांकि सरकार ने इस बार नए सिरे से रोस्टर जारी करने का निर्णय लिया है। इसमें जो पंचायतें दो बार आरक्षित रही हैं, उन्हें ओपन कर दिया जाएगा। कोली समाज के अध्यक्ष शक्त राम कश्यप ने सरकार से अनुरोध किया है कि रोस्टर तैयार करते समय किसी प्रकार के राजनैतिक दबाव के चलते पक्षपात अथवा छेड़छाड़ न की जाए। रोस्टर के मुताबिक हर पांच वर्ष के बाद सामान्य, सामान्य महिला वर्ग, अनुसूचित जाति वर्ग, अनुसूचित जाति महिला वर्ग, जनजाति और ओबीसी को मौका दिया जाएगा। उन्होंने पंचायत रोस्टर में पक्षपात का आरोप लगाते हुए बताया कि मशोबरा ब्लॉक की पीरन पंचायत में 50 सालों में अनुसूचित जाति के पुरुष वर्ग को आज तक पंचायत प्रधान बनने का मौका नहीं मिला है। इस पंचायत में वर्ष 2011 जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या 57 प्रतिशत आंकी गई है।
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उन्होंने कहा कि यह ऐसा कैसा रोस्टर है कि दलित पुरुष को पांच दशक में भी प्रधान बनने का मौका नहीं मिला। उन्होंने पंचायत रोस्टर में भाई भतीजावाद और राजनैतिक दबाव का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1974 में पीरन पंचायत का गठन हुआ था। बीते 50 वर्षों में से 40 वर्षों तक सामान्य वर्ग को प्रधान बनने का अवसर प्राप्त हुआ। हालांकि दो बार अनुसूचित जाति की महिलाएं अवश्य पंचायत प्रधान बनीं लेकिन पुरुष वर्ग को आज तक मौका नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि पीरन पंचायत की तरह प्रदेश में न जाने कितनी ऐसी पंचायतें होगी जहां पर राजनैतिक दबाव के चलते रोस्टर के साथ छेड़छाड़ होती होगी।
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