जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में सीबकथोर्न की खेती के लिए पिछले दो दशकों से काम चल रहा है। कुल्लू से शिमला तक कई कार्यशालाएं हो चुकी हैं लेकिन वन विभाग ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। डेढ़ साल पहले सीबकथोर्न एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सरकार के आदेश पर 250 करोड़ के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव भी भेजा पर वह फाइलों में धूल फांक रहा है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर और पांगी वन क्षेत्र की 6000 हेक्टेयर जमीन पर सीबकथोर्न को लगाने के लिए यह प्रस्ताव भेजा गया था।
पीएम मोदी भी कह चुके हैं सीबकथोर्न लगाने की बात
मई 2018 में जम्मू यूनिवर्सिटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लेह, लद्दाख सहित बर्फीले क्षेत्रों में सीबकथोर्न लगाने की बात कही थी। बावजूद इसके सरकारी अमला नहीं जागा। सेवानिवृत्त खंड विकास अधिकारी बलबीर सिंह यार्की ने कहा कि सीबकथोर्न लगाने से लोगों को रोजगार मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण भी हो सकेगा।