हिमाचल में अवैध खनन के कारोबार से लाखों लोग जुड़े हैं। कार्रवाई सिर्फ उन्हीं लोगों पर होती है, जो मौके पर पकड़े जाते हैं। सरकार ने एक साल में अवैध खनन के 8,360 मामले पकड़े हैं। मंडी में सबसे अधिक 1911 मामले सामने आए हैं। सोलन में सबसे कम 205 अवैध खनन के मामले पकड़े गए हैं।
अवैध खनन करने वालों से अभी तक कुल 4.20 करोड़ का जुर्माना वसूला गया है। हैरानी की बात है कि लाहौल-स्पीति और किन्नौर में कोई भी साइट सरकार ने नीलाम नहीं की है और वहां सरकार को मोटी राजस्व चपत लग रही है।
प्रदेश के 12 जिलों में अवैध खनन जोर-शोर से चल रहा है। अवैध खनन रोकने को सरकार ने प्रदेश में करीब साढ़े चार सौ खनन साइटों की नीलामी की है। इसके बाद भी अवैध खनन किया जा रहा है। ट्रकों और ट्रैक्टरों से खनिज की क्षमता से अधिक ढुलाई की जा रही है।
जिन खनन साइटों से वाहनों में खनिजों की ओवरलोडिंग की जाती है, उन खनन साइटों के मालिकों और मजदूरों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। वाहन मालिक पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। जिस खनन साइट से वाहनों में ओवर लोडिंग की जा रही है, वहां भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पिछले दिनों ऊना में अवैध खनन के मामले में विधानसभा की कमेटी ने विभाग सहित पुलिस के अफसरों को जवाब तलबी तक की थी। इसके बाद विभाग के अधिकारियों सहित अन्य विभागों और पुलिस के अधिकारियों ने बराबर छापे मारे हैं ताकि अवैध खनन रोका जा सके।
उधर, उद्योग विभाग के निदेशक हंसराज शर्मा ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग के अधिकारी और पुलिस अफसर नियमित रूप से छापे मार रहे हैं। खनन साइटों के मालिकों को भी जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जिला अवैध खनन के पकड़े मामले
1. कांगड़ा 1926
2. मंडी 1773
3. सिरमौर 788
4. हमीरपुर 756
5. ऊना 659
6. कुल्लू 608
7. बिलासपुर 440
8. चंबा 417
9. सोलन 205
10.शिमला 395
11. किन्नौर 130
12. लाहौल-स्पीति 125
कुल 8,360